Sachin Tendulkar World Cup History:विश्व कप के Master Blaster ‘सचिन तेंदुलकर’ के अब तक नहीं टूटे ये रिकॉर्ड

Sachin Tendulkar World Cup History : सचिन तेंदुलकर, जिन्हें अक्सर “लिटिल मास्टर” या “मास्टर ब्लास्टर” कहा जाता है, एक ऐसा नाम है जो क्रिकेट इतिहास के इतिहास में दर्ज है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी दो दशकों से अधिक की उल्लेखनीय यात्रा में कई उपलब्धियाँ और प्रशंसाएँ शामिल हैं। उनके करियर के सबसे दिलचस्प अध्यायों में से एक उनका विश्व कप इतिहास है, जहां उन्होंने एक अमिट छाप छोड़ी। इस लेख में, हम सचिन तेंदुलकर की विश्व कप यात्रा और क्रिकेट की दुनिया में इसके महत्व पर प्रकाश डालते हैं।

सचिन रमेश तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल 1973 को मुंबई, भारत में हुआ था। उनकी विलक्षण प्रतिभा छोटी उम्र से ही स्पष्ट हो गई थी और उन्होंने 1989 में 16 साल की उम्र में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए पदार्पण किया था। उनके शुरुआती करियर में लगातार अच्छा प्रदर्शन और रनों की कभी न मिटने वाली भूख थी।

Sachin Tendulkar World Cup History
Sachin Tendulkar World Cup History

Sachin Tendulkar World Cup History : स्टारडम की ओर उदय


जैसे-जैसे सचिन का करियर आगे बढ़ा, उन्होंने खुद को दुनिया के प्रमुख बल्लेबाजों में से एक के रूप में स्थापित कर लिया। चतुराई और शक्ति के साथ खेलने की उनकी क्षमता ने उन्हें एक ताकतवर खिलाड़ी बना दिया। 90 के दशक की शुरुआत तक, उन्हें पहले से ही भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जाने लगा था।

Sachin Tendulkar World Cup History : सचिन का वर्ल्ड कप सफर शुरू


सचिन तेंदुलकर का विश्व कप सफर 1992 में शुरू हुआ जब उन्हें ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में आयोजित क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम के लिए चुना गया। हालांकि भारत टूर्नामेंट नहीं जीत सका, लेकिन सचिन का प्रदर्शन उल्लेखनीय था और उन्होंने विश्व मंच पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

विश्व कप की जीत
1992 क्रिकेट विश्व कप
1992 क्रिकेट विश्व कप में सचिन ने पहली बार बड़े टूर्नामेंट में भाग लिया। हालाँकि भारत फ़ाइनल में नहीं पहुँच सका, लेकिन सचिन के जोशीले प्रदर्शन ने आने वाली महानता का संकेत दे दिया।

1996 क्रिकेट विश्व कप
1996 में भारतीय उपमहाद्वीप में आयोजित क्रिकेट विश्व कप सचिन के करियर का एक महत्वपूर्ण क्षण था। वह 523 रनों के साथ टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बनकर उभरे। हालांकि, भारत खिताब नहीं जीत सका।

1999 क्रिकेट विश्व कप
सचिन की निरंतरता और उत्कृष्टता 1999 में इंग्लैंड में आयोजित क्रिकेट विश्व कप में भी जारी रही। उन्होंने शतक तो लगाया लेकिन भारत को जीत नहीं दिला सके।

2003 क्रिकेट विश्व कप
दक्षिण अफ्रीका में 2003 क्रिकेट विश्व कप में विश्व कप इतिहास में सचिन तेंदुलकर का बेहतरीन फॉर्म देखा गया। उन्होंने 673 रन बनाकर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो कई वर्षों तक कायम रहा। हालाँकि भारत कप नहीं जीत सका, लेकिन सचिन की असाधारण बल्लेबाजी टूर्नामेंट का मुख्य आकर्षण थी।

रिकॉर्ड और उपलब्धियां
अपने विश्व कप करियर के दौरान, सचिन तेंदुलकर ने कई रिकॉर्ड बनाए, जिनमें विश्व कप इतिहास में सबसे अधिक रन और टूर्नामेंट में सबसे अधिक शतक शामिल हैं।

विश्व कप से संन्यास
2003 संस्करण के बाद सचिन ने विश्व कप क्रिकेट को अलविदा कह दिया। उन्होंने अन्य प्रारूपों में भारत का प्रतिनिधित्व करना जारी रखा लेकिन विश्व कप चरण से दूर जाने का फैसला किया।

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2003 वर्ल्ड कप में जब सचिन ने पाकिस्तानी शोएब अख्तर को पॉइंट के ऊपर से छक्का मारा था, तब विराट कोहली भी उछल पड़े थे। दरअसल भारतीय पारी के दूसरे ओवर की चौथी गेंद 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से डाली गई थी और सचिन ने कमाल का छक्का जड़ दिया था। विराट कोहली ने उस शॉट से जुड़ा बयान देकर इस विश्व कप में भारत-पाक भिड़ंत से पहले 2003 वर्ल्ड कप मैच की याद दिला दी। वह मैच आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। तारीख थी 1 मार्च 2003 और सेंचुरियन में हिंदुस्तान के सामने पाकिस्तान था। पाकिस्तानी टीम ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया।

सलामी बल्लेबाज सईद अनवर ने शतक ठोक दिया। उन्होंने 7 चौकों की मदद से 126 गेंद पर 101 रनों की पारी खेली। पाकिस्तान को पहला झटका 11वें ओवर की पांचवीं गेंद पर लगा, जब तौफीक उमर को 22 के निजी स्कोर पर जहीर खान ने बोल्ड कर दिया। इसके बाद दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे, लेकिन सईद अनवर ने खूंटा गाड़ दिया। पाकिस्तान के धाकड़ बल्लेबाज इंजमाम उल हक रन आउट हुए। आखिर में राशिद लतीफ ने तेज 29* रन बनाकर टीम का स्कोर निर्धारित 50 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 273 तक पहुंचा दिया।

आज के हिसाब से उस वक्त के 273 रन 360 रनों के बराबर थे। पाकिस्तान के पास वसीम अकरम, शोएब अख्तर और वकार यूनिस की खतरनाक पेस तिकड़ी थी। पाकिस्तानी फैंस को लग रहा था कि हम पहली बार वर्ल्ड कप में टीम इंडिया पर भारी पड़ सकते हैं। पर सचिन और सहवाग की सलामी जोड़ी ने उल्टी गंगा बहा दी ।

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शोएब अख्तर के दूसरे ओवर की अंतिम 3 गेंदों पर सचिन ने 14 रन बटोर लिए। चौथी आउटसाइड ऑफ गेंद को जब सचिन ने पॉइंट के ऊपर से छक्के के लिए भेजा, उसी वक्त विराट कोहली की तरह तमाम इंडियन फैंस खुशी के मारे उछल पड़े थे 5 ओवरों में ही भारतीय टीम का स्कोर 50 पार कर गया।

हालांकि छठे ओवर में कप्तान वकार यूनिस ने लगातार दो गेंद पर दो विकेट लेकर खेल बदल दिया। चौथी गेंद पर सहवाग 21 रन बनाकर शॉर्ट कवर्स पर लपके गए। पांचवीं गेंद पर वकार यूनिस ने सौरव गांगुली के खिलाफ चाल चली। उन्होंने एक एक्स्ट्रा स्लिप फील्डर लगाकर दादा को इनस्विंगर डाल दी।
सौरव पहली ही गेंद पर बगैर खाता खोले LBW आउट हो गए।

Sachin Tendulkar World Cup History

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लगातार 2 झटकों के बाद अब भारतीय टीम संकट में थी। पर स्टेडियम में मौजूद पब्लिक और टीवी देख रहे दर्शक सचिन-सचिन का नारा लगा रहे थे। मानो उन्हें किसी के आउट होने से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था। सचिन है, संभाल लेगा। सचिन ने तीसरे विकेट के लिए मोहम्मद कैफ के साथ 102 गेंद पर 102 रन की साझेदारी बनाई। कैफ 60 गेंद पर 5 चौकों की मदद से 35 रन बनाकर शाहिद अफरीदी के 22वें ओवर की चौथी गेंद पर बोल्ड हो गए।

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कुछ लोग अक्सर सचिन पर धीमा खेलने का आरोप लगाते रहते हैं। उन्होंने शायद वर्ल्ड कप के इस मैच में सचिन के हाथों पाकिस्तान की कुटाई नहीं देखी। सचिन ने 75 गेंद पर 12 चौकों और 1 छक्के की मदद से 130 की स्ट्राइक रेट के साथ 98 रनों की पारी खेली थी। सचिन शतक जरूर चूक गए और 28वें ओवर की चौथी गेंद पर पवेलियन लौट गए, लेकिन उन्होंने जाने से पहले टीम इंडिया की जीत सुनिश्चित कर दी थी। अंत में युवराज सिंह और राहुल द्रविड़ ने मिलकर 99* रनों की पार्टनरशिप बनाई और भारत 26 गेंद शेष रहते यह मुकाबला 6 विकेट से जीत गया।

वसीम अकरम, वकार यूनिस और शोएब अख्तर की तिकड़ी को उस जमाने में विश्व क्रिकेट का सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजी आक्रमण माना जाता था। उनके सामने 273 रन चेज करना बड़ी चुनौती थी। ऐसे में सचिन ने पहले ही ओवर से काउंटर अटैक शुरू कर दिया था। उन्होंने शोएब अख्तर की जैसी पिटाई की, अगले कुछ ओवरों के लिए पाकिस्तान को मजबूरन उन्हें गेंदबाजी आक्रमण से हटाना पड़ा। वसीम अकरम को पूरे मैच में कोई सफलता नहीं मिली।

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जबकि 2 विकेट हासिल करने वाले वकार यूनिस ने 8.4 ओवर में ही 71 रन दे दिए। शोएब अख्तर को 10 ओवर में 72 रन देकर 1 सफलता नसीब हुई। सचिन तेंदुलकर को मैन ऑफ द मैच का खिताब दिया गया। सचिन ने 2003 विश्व कप की 11 पारियों में 1 शतक और 6 अर्धशतकों के साथ सबसे ज्यादा 673 रन बनाए थे।

हालांकि भारत फाइनल में हार गया था। पर 8 साल बाद 2011 में सचिन ने वर्ल्ड कप जीतने का ख्वाब साकार किया था। जब भी पाकिस्तान से मैच होता था, तब सचिन के मैदान पर रहते हुए हिंदुस्तान में पटाखे फूटते थे और आउट होने के बाद पाकिस्तान में यह सचिन तेंदलकर का रुतबा बताने के लिए काफी है.

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