Sachin Dhas, Biography in Hindi, Domestic Career, IPL, Net worth, U-19 अंडर 19 टीम का चमकता सितारा सचिन दास? ‘तेंदुलकर’ से जुड़ा खास कनेक्शन

Sachin Dhas एक भारतीय क्रिकेटर हैं। इनके पिता का नाम संजय दास है इनका पूरा नाम सचिन संजय दास है।   वह दाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के ऑफ ब्रेक गेंदबाज हैं। उन्होंने फरवरी 2024 में रणजी ट्रॉफी में महाराष्ट्र क्रिकेट टीम के लिए प्रथम श्रेणी में पदार्पण किया।

3 फरवरी 2005 को जन्मे सचिन धस महाराष्ट्र के बीड जिले से हैं। उनके जन्म से पहले ही उनके पिता संजय धस, जो सचिन तेंदुलकर के बहुत बड़े प्रशंसक हैं, ने तय कर लिया था कि वे अपने बेटे को क्रिकेटर बनाएंगे। इनकी आयु अभी करीब 19 साल की है। टीम मे इनकी भूमिका बैटर की है।

सचिन दास ने दक्षिण अफ्रीका में खेले जा रहे U19 World Cup में अपनी प्रतिभा का जोरदार प्रदर्शन सभी को अपना फैन बना लिया है । सचिन दास ने इंडियन अंडर -19 टीम ने मंगलवार को हुए दक्षिण अफ्रीका बनाम इंडिया सेमीफइनल मैच में 95 गेंदों में 11 चौके और एक छक्‍के की मदद से 96 रन बना कप्‍तान उदय सहारन के साथ रिकॉर्ड 171 रन की साझेदारी की और जीत हासिल की। आईसीसी अंडर-19 वर्ल्‍ड कप 2024 के फाइनल में पहुंचने के बाद लोगो ने सचिन दास की तुलना सचिन तेंदुलकर से की है

आज इस आर्टिकल में सचिन दास के क्रिकेट सफर और उनकी जीवन के सभी पहलुओं के बारे में बताएँगे तो सचिन दास कौन है? कहाँ से है और उनका करियर कहाँ से शुरू हुआ। जानने के लिए आगे पढ़े। अब जानिए सचिन दास की अद्वितीय कहानी और उनके खेल के जादू को! उनके क्रिकेट सफर और जीवन के रोमांचक पहलू यहाँ पढ़ें

Sachin Dhas की टीमें

इंडिया बी अंडर-19

भारत अंडर-19

इंडिया सी अंडर-19,

 महाराष्ट्र अंडर-19,

इंडिया डी अंडर-19,

कोल्हापुर टस्कर्स

Sachin Dhas बैटिंग कैरियर आँकड़े

प्रारूपमैचपारीनॉटरनबेस्टऔसतगेंदस्ट्राइकशतकफिफ्टीचौकेछक्के
एफसी61002679826.70   55148.4501247

Sachin Dhas के हालिया मैच

महाराष्ट्र बनाम ओडिशा 20 एवं 38 — 13-नवम्बर-2024 कटक एफसी

महाराष्ट्र बनाम सेवाएँ 30 एवं 44–06-नवम्बर-2024  पुणे एफसी

महाराष्ट्र बनाम मेघालय 6–26-अक्टूबर-2024 औरंगाबाद एफसी

महाराष्ट्र बनाम मुंबई 0 एवं 98–18-अक्टूबर-2024 मुंबई एफसी

महाराष्ट्र बनाम जे+के 10 0/6 11-अक्टूबर-2024 श्रीनगर एफसी

महाराष्ट्र बनाम सेवाएँ 19 एवं 2–16-फरवरी-2024 दिल्ली एफसी

भारत अंडर-19 बनाम ऑस्ट्रेलिया अंडर-19- 9 — 11-फ़रवरी-2024 बेनोनी योडी

आईएनडी अंडर-19 बनाम एस अफ्रीका अंडर19- 96–06-फरवरी-2024 बेनोनी योडी

आईएनडी अंडर-19 बनाम एनईपी अंडर-19-116–02-फरवरी-2024 Bloemfontein योडी

IND अंडर-19 बनाम NZ U19-15–30-जनवरी-2024 Bloemfontein योडी

Sachin Dhas का डेब्यू/आखिरी मैच

एफसी मैच

पदार्पण महाराष्ट्र बनाम सर्विसेज, दिल्ली – 16 फरवरी – 19 फरवरी, 2024

अंतिम कटक में महाराष्ट्र बनाम ओडिशा – 13 – 15 नवंबर, 2024

Sachin Dhas जन्म और फैमिली

सचिन दास भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम के बल्लेबाज है। हाल ही में हुए U19 वर्ल्ड कप भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका सेमीफइनल मैच में भारत को जीत दिलाने में सचिन दास की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। और इसी के चलते वो सुर्खिये में बने हुए है।

Sachin Dhas का जन्म 3 फरवरी 2005 को महाराष्ट्र के छोटे से जिले बीड (Beed) में हुआ था। सचिन दास के पिता का नाम संजय दास है वे अपने बेटे को शुरू से ही क्रिकेटर बनाना चाहते थे इसलिए अपने बेटे का नाम भी सचिन तेंदुलकर से इंस्पायर्ड होकर सचिन रखा। Sachin Dhas की माँ का नाम सुरेखा दास है जो महाराष्ट्र पुलिस में सहायक पुलिस निरीक्षक हैं और उनकी एक बहन है जिसका नाम प्रतीक्षा दास है।

Sachin Dhas क्या आईपीएल नीलामी में हैं

सचिन धास (भारत), जिनका आधार मूल्य ₹30 लाख था, अनसोल्ड रहे ।

Sachin Dhas की पारी ने मचाया गदर,

भारत की शानदार जीत में Sachin Dhas और कप्तान उदय सहारन ने अहम भूमिका निभाई. खासकर सचिन धास ने 96 रन की पारी खेली. सचिन भले ही शतक से चूक गए लेकिन उनकी पारी की दम पर ही भारतीय टीम मैच में वापसी करने में सफल रही थी।

U19 captain of 2024: अंडर 19 वर्ल्ड कप (Under 19 World Cup 2024) सेमीफाइनल में भारत ने साउथ अफ्रीका को रोमांचक मैच में 2 विकेट से हरा दिया. भारत की शानदार जीत में सचिन धास और कप्तान उदय सहारन ने अहम भूमिका निभाई. खासकर सचिन धास ने 96 रन की पारी खेली. सचिन भले ही शतक से चूक गए लेकिन उनकी पारी दम पर ही भारतीय टीम मैच में वापसी करने में सफल रही थी।  

कप्तान उदय और सचिन ने मिलकर पांचवें विकेट के लिए रिकॉर्ड 171 रन की पार्टनरशिप की जिसने मैच को पलट दिया. भले ही सचिन को प्लेयर ऑफ द मैच के खिताब नहीं मिला लेकिन यह पारी हमेशा याद रहेगी. बता दें कि एक समय भारत का स्कोर 32 रन पर 4 विकेट थे, लेकिन इसके बाद उदय और सचिन ने ऐतिहासिक पारी खेलकर भारत की जीत की नींव रखी. ऐसे में जानते हैं सचिन दास के बारे में…

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Sachin Dhas कौन है, जिसका है ‘तेंदुलकर’ से खास कनेक्शन

Sachin Dhas) महाराष्ट्र के बीड के रहने वाले हैं, उनका जन्म एथलीटों के परिवार में हुआ था. उनके पिता संजय दास ने पहले ही तय कर दिया था कि सचिन को क्रिकेटर बनाएंगे। भारत के अंडर 19 टीम की हीरो सचिन दास का नाम भी उनके पिता ने सचिन तेंदुलकर के नाम पर रखा था। 19 साल के सचिन दास (Sachin Dhas) ने तीन दिन पहले खेले गए मैच में अपने पिता के जन्मदिन पर शतक जमाने में सफल रहे थे।

Sachin Dhas के पिता ने तेंदुलकर के नाम पर रखा बेटे का नाम

Sachin Dhas के पिता ने हाल ही मे इंडियन एक्सप्रेस के दिए इंटरव्यू में खुलासा किया था कि “गावस्कर के बाद सचिन ही उनके फेवरेट क्रिकेटर रहे थे। ऐसे में जब उनका जन्म हुआ तो मैंने अपने बेटे का नाम तेंदुलकर के नाम पर रखने का फैसला किया।

यहाँ पर हम आपको यह बता दें कि सचिन की मां सुरेखा धास महाराष्ट्र पुलिस में असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (एपीआई) हैं, इसके साथ-साथ सचिन के माता-पिता राज्य स्तर पर कबड्डी भी खेल चुके हैं. यही नहीं उनके पिता विश्वविद्यालय स्तर पर क्रिकेटर भी रहे है।

Sachin Dhas को परफेक्ट बल्लेबाज बनाने के लिए पिता ने लिए पैसे उधार

अपने बेटे को सही ट्रेनिंग देने के लिए सचिन के पिता ने पैसे उधार लेकर बेटे के लिए टर्फ विकेट तैयार किया जिस पर सचिन बल्लेबाजी कर सके। सचिन के पिता Sachin Dhas ने कहा कि, मैंने अपने बेटे के लिए टर्फ विकेट तैयार करने के लिए पैसे उधार लिए थे।

बीड में जल संकट के कारण विकेटों को फ्रेश रखना एक कठिन काम हुआ करता था,  ऐसे में मुझे हर तीसरे दिन पानी का टैंकर बुलाना पड़ता था। इसके लिए मुझे पैसे भी उधार लेने पड़े थे. सचिन जिस अंदाज में आज बल्लेबाजी कर रहे हैं उसकी सफलता का श्रेय कोच अजहर को जाता है।

Sachin Dhas U19 WC 2024 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले तीसरे बल्लेबाज  

Sachin Dhas इस अंडर 19 वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले तीसरे बल्लेबाज हैं अब तक उन्होंने 6 मैच खेलकर 294 रन बनाए हैं जिसमें एक शतक शामिल है।

Sachin Dhas का घरेलू क्रिकेट करियर

Sachin Dhas के पिता संजय दास को क्रिकेट के प्रति शौक था उन्होंने अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में खूब क्रिकेट खेला था पर क्रिकेट को वे प्रोफेशन नहीं बना पाए। इसी के चलते वे अपने बेटे को क्रिकेटर बनाना चाहते थे और अपने बेटे का नाम सचिन तेंदुलकर से प्रेरित होकर सचिन दास रखा।

सचिन दास को अपने पिता के द्वारा क्रिकेट के प्रति प्रोत्साहित करने से सचिन का ध्यान क्रिकेट की तरफ ज्यादा हो गया पर उनकी माँ ये नहीं चाहती थी हालांकि बाद में सचिन को राज्य स्तर पर खेलता हुआ देख और उसकी क्रिकेट में रूचि को देख उन्होंने अपना मन बदल लिया। Sachin Dhas राज्य स्तर पर महाराष्ट्र अंडर-19 टीम के लिए खेलते हैं, वह एक स्थानीय क्लब कोल्हापुर टस्कर के लिए भी खेलते हैं।

हाल ही में चल रहे अंडर-19 वर्ल्ड कप में सचिन दास बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और इसी में नेपाल के खिलाफ 101 गेंदों में 116 रनों की शानदार पारी खेलते हुए तीन छक्को और 11 चौको की मदद से शतक लगाया था। और हाल ही में हुए सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारी दबाव की स्थिति में भी 96 रनों की जबरदस्त पारी खेलते हुए भारत को फाइनल में भी पहुंचाया।

Sachin Dhas ने 4 साल की उम्र में थामा बल्ला, छक्के मारे तो चेक किया गया बैट

भारतीय क्रिकेट टीम U19 वर्ल्ड कप (Under 19 World Cup) में फाइनल में पहुंच चुकी है. अंडर19 भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में मेजबान दक्षिण अफ्रीका को कांटे की टक्कर में हराया। एक समय भारतीय टीम 32 रन पर 4 विकेट गंवाकर संघर्ष कर रही थी. सचिन दास (Sachin Dhas) ने इस दबाव से भारत को निकाला।  

यूं तो कप्तान उदय सहारन क्रीज पर टिके हुए थे, लेकिन वो Sachin Dhas ही थे, जिन्होंने आग उगल रहे अफ्रीकी गेंदबाजों को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया. जब सचिन बैटिंग करने आए तो भारत का स्कोर 12वें+ ओवर में 32 रन था।

यानी रनरेट 3 से भी कम. तब सचिन ने 47 गेंद पर फिफ्टी ठोक दी, जिसमें 9 चौके शामिल थे. बाउंसर पर उनके पुल और हुक देखने लायक थे।

अफ्रीकी पिच पर अफ्रीकी पेस अटैक को धूल चटाने वाले सचिन दास (Sachin Dhas) महाराष्ट्र के बीड़ जिले से आते हैं. सूखे से परेशान रहने वाले इस शहर के सचिन ने छोटी उम्र से ही बल्ला थाम लिया था।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक सचिन दास ने साढ़े 4 साल की उम्र से क्रिकेट सीखना शुरू कर दिया था। सचिन के पिता संजय दास स्वास्थ्य विभाग में काम करते हैं. मां सुलेखा असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) हैं. संजय दास यूनिवर्सिटी लेवल पर क्रिकेट खेल चुके हैं।

संजय दास बताते हैं कि उन्होंने जब कम उम्र में Sachin Dhas को क्रिकेटर बनने की ट्रेनिंग दिलानी शुरू की तो मां सुलेखा को यह ज्यादा पसंद नहीं आया। इस बीच सचिन ने एजग्रुप टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. जब सचिन का चयन स्टेट टीम (एजग्रुप) में हो गया तो मां सुलेखा भी उसके क्रिकेट बनने के फैसले से खुश थीं और पूरा सहयोग करने लगीं।

जैसा कि सबने देखा कि Sachin Dhas ना सिर्फ रुककर खेलना जानते हैं, बल्कि तगड़े शॉट भी लगाते हैं. कुछ साल पहले तो जब सचिन ने पुणे में एक लोकल टूर्नामेंट में लंबे-लंबे छक्के लगाए तो आयोजकों ने उनके बैट तक चेक किए। जहां तक अन्डर-19 वर्ल्ड कप की बात है तो उन्होंने सेमीफाइनल में 95 गेंद पर 96 रन की बेमिसाल पारी खेली. इससे ठीक पहले ग्रुप मैच में उन्होंने नेपाल के खिलाफ शतक लगाया था।

Sachin Dhas की नेटवर्थ

Net worth           Between Rs 1 to Rs 2 Lakh

Total BCCI Income           Rs 1.3 Lakhs

MPL Auction Price           Rs 1.5 Lakhs

Brand Endorsement Earnings     Nil

Source of Income            Cricketer

Sachin Dhas के बारे में रोचक तथ्य

Sachin Dhas का तेंदुलकर से कोई भी पर्सनली रिश्ता नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के हिसाब से उनके पिता एक क्रिकेट प्रेमी थे और सुनील गावस्कर के बाद सचिन तेंदुलकर उनके पसंदीदा क्रिकेटर थे, जिसके चलते उन्होंने अपने बेटे का नाम महान क्रिकेटर तेंदुलकर के नाम पर रखा।

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Sachin Dhas: एक ‘जुनूनी’ तेंदुलकर फ़ैन और ‘ज़िद्दी’ पिता के फ़ितूर की कहानी

Sachin Dhas
Sachin Dhas

‘अगर बच्चे के लिए कुछ करना है और अपनी ख़्वाहिश भी पूरी करनी है तो उसके पीछे पागल होना ही पड़ेगा’

90 का दशक। भारत के करोड़ों युवाओं की तरह संजय धस भी सचिन तेंदुलकर के दीवाने थे। ख़ुद संजय के शब्दों में वह तेंदुलकर के लिए ‘पागल’ थे और उनकी हर मैच, हर पारी और हर गेंद देखते थे। कभी किसी काम की वजह से सचिन की पारी की 10 गेंद भी छूट गई तो उन्हें लगता था कि उन्होंने कोई ‘पाप’ कर दिया है।

संजय भी अपने हीरो की तरह क्रिकेट खेलते थे, लेकिन क्लब और जिला स्तर पर क्रिकेट खेलने पर ही उन्हें पता चल गया था कि शुरुआती और बुनियादी ट्रेनिंग ना होने के कारण वह क्रिकेट में अधिक आगे तक नहीं जा सकते हैं। हालांकि उन्होंने तय किया कि जब भी उनको बेटा होगा, उसका नाम वह ‘सचिन’ ही रखेंगे और उसे क्रिकेटर ही बनाएंगे।

कट टू 2000s। नई सदी और नए दशक में जब 2005 में उन्हें पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई तो पहले से तय मुताबिक उन्होंने अपने बेटे का नाम ‘सचिन’ रखा और उसे ‘इंडिया क्रिकेटर’ बनाने के अपने मिशन में लग गए। इस मिशन में उनके रास्ते में कई कांटे, कई दिक्कतें भी आईं, लेकिन यह संजय का दृढ़ निश्चय, जिद, लगन और जुनून ही था कि वह अपने बेटे को ‘इंडिया खेलने’ के अपने ‘सपने’ के क़रीब लाते चले गए।

कट टू 2024। लगभग दो दशक बाद अब संजय का बेटा Sachin Dhas साउथ अफ़्रीका में चल रही अंडर-19 विश्व कप में भारतीय टीम का एक प्रमुख हिस्सा है। तेंदुलकर की ही तरह 10 नंबर जर्सी पहनने वाले सचिन ने इस टूर्नामेंट में 73.50 की औसत और 116.66 के स्ट्राइक रेट से 294 रन बनाकर इंडिया अंडर-19 टीम को फ़ाइनल में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें एक शतक और साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में 96 रन की बेहद महत्वपूर्ण पारी शामिल है।

संजय कहते हैं, “जब वह पैदा भी नहीं हुआ था, तब ही मैने ठान लिया था कि वह क्रिकेट ही खेलेगा, उसके अलावा कुछ नहीं करेगा। इसके लिए मुझे चाहे जो करना पड़ता, मैं करता। जब वह दो-ढाई साल का था, तभी मैंने उसे MRF का बैट थमा दिया और रोज़ सुबह उसे अपने साथ क्रिकेट ग्राउंड ले जाता था।

जब वह चार-साढ़े चार साल का था, तभी मैंने उसे क्रिकेट एकेडमी में डाल दिया। मुझे पता था कि अगर उसे बड़ा करना है और इंडिया खेलना है तो काफ़ी कम उम्र से ही उसे ट्रेनिंग शुरू करनी होगी। मैं नहीं चाहता था कि वह मेरी तरह जिला स्तर का क्रिकेटर बनकर रहे।”

यह 2009-10 की बात है। संजय अपने बेटे को अज़हर शेख़ की एकेडमी में डाल देते हैं, जो ज़िले के सरकारी छत्रपति शिवाजी महाराज स्टेडियम में आदर्श क्रिकेट एकेडमी नाम से एक प्राइवेट क्रिकेट ट्रेनिंग सेंटर चलाते थे। अज़हर के पास सचिन से पहले और सचिन के बाद बहुत बच्चे आए लेकिन उन्होंने पहली नज़र में ही पहचान लिया था कि यह बच्चा कुछ अलग है।

ख़ुद अज़हर के शब्दों में, “एकेडमी में 60-70 बच्चे थे, लेकिन सचिन उनमें से बहुत अलग था। जो भी सिखाओ, वह दूसरे बच्चों के मुक़ाबले जल्दी सीख जाता था और फिर दूसरी नई चीज़ें सीखने के लिए कहता था। उसे अपना अनुशासन पता था। वह सुबह 500 से 600 तो शाम को 700 से 800 गेंदें खेलता था। गेंदबाज़ थक जाते थे, लेकिन उसने कभी शिक़ायत नहीं कि वह थक गया है या उसे अब आगे नहीं खेलना है।”

समय बीतता गया और Sachin Dhas आगे बढ़ता गया। क्लब स्तर से आगे उठकर वह ज़िले स्तर की क्रिकेट खेलने लगा। किसी मैच में अगर वह जल्दी आउट हो जाता था तो वह अपने पापा से उसी टीम के विरूद्ध फिर मैच लगाने की बात करता ताकि उसी गेंदबाज़ को निशाना बनाया जा सके, जिसने उसे आउट किया था। वह 12 साल की ही टीम में महाराष्ट्र की अंडर-14 टीम में आ गया और इसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

संजय बताते हैं, “जब वह राज्य की अंडर-14 टीम में आ गया, तब उसकी मम्मी (सुरेखा धस) को भी विश्वास हो गया कि यह क्रिकेट में बहुत आगे जा सकता है। उससे पहले सुरेखा को सचिन का क्रिकेट खेलना नहीं पसंद था और वह चाहती थीं कि सचिन पढ़ाई पर ध्यान दे।

उसे लगता था कि बीड जैसी छोटी जगह से क्रिकेट सीखकर कोई इसे करियर नहीं बना सकता है। मैंने कभी भी अपनी पत्नी की नहीं सुनी। मैंने सोच लिया था कि सचिन का करियर ही क्रिकेट है और बाक़ी कोई करियर नहीं है।”

उस समय बीड में क्रिकेट का उतना माहौल नहीं था। जिले के स्टेडियम में एक ही ग्राउंड था, जिसमें मैटिंग विकेट पर क्रिकेट सिखाया जाता था। सचिन के अंडर-14 क्रिकेट खेलने के दौरान सत्येन लांडे, अजय च्वहाण और राजू काने जैसे पूर्व महाराष्ट्र के क्रिकेटरों, चयनकर्ताओं और कोचिंग स्टाफ़ के लोगों ने सचिन की खेल की तारीफ़ की, लेकिन यह भी सलाह दिया कि अगर सचिन को आगे बढ़ना है तो उसे मैट की जगह टर्फ़ विकेटों पर अभ्यास करना होगा।

उस समय बीड में कहीं भी टर्फ़ विकेट नहीं था। संजय ने इसके लिए अपने अधिकारी भाई और साले से आर्थिक मदद ली, जिलाधिकारी से अनुमति मांगा और लगभग छह से सात लाख रूपये ख़र्च कर सरकारी स्टेडियम में चार टर्फ़ विकेट बनवा दिए। इससे सचिन ही नहीं बीड के सैकड़ों बच्चों को भी फ़ायदा हुआ, जो टर्फ़ पिच पर अभ्यास के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाते थे।

संजय को बीड के उन दर्जनों बच्चों के नाम मुंहजुबानी याद हैं, जो अब राज्य, रणजी या राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट में बीड व महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनका नाम लेते वक़्त संजय का सीना गर्व से फूल जाता है कि सिर्फ़ सचिन ही नहीं बीड के अन्य लड़के भी क्रिकेट में अब आगे निकल रहे हैं।

ख़ैर, सचिन का सफ़र जारी था। उसने 12 साल की उम्र में अंडर-14, 14 साल की उम्र में अंडर-16 और 16 साल की उम्र में अंडर-19 क्रिकेट खेल लिया। अब सचिन के एक लेवल और ऊपर जाने की बारी थी।

संजय को लगता था कि एकेडमी में और भी बहुत बच्चे हैं, जिसके कारण सचिन पर्याप्त अभ्यास नहीं कर पाता है। संजय चाहते थे कि उनका बेटा सुबह तीन से चार घंटे और शाम को दो से तीन घंटे अभ्यास करे, कम से कम रोज 1200 से 1400 गेंद खेले और इसके कारण दूसरे बच्चों का अभ्यास भी नहीं प्रभावित हो।

इसके लिए संजय ने अपने एक पुराने पुश्तैनी घर को गिरवा दिया और उसे एक इनडोर प्रैक्टिस ज़ोन के रूप में विकसित किया। वहां उन्होंने फ़्लड लाईट लगवाई ताकि देर रात में भी सचिन अभ्यास कर सके; छत लगवाया, ताकि बारिश में भी उनका बेटा ना रूके; एस्ट्रोटर्फ़ बिछवाया; ताकि सही पिच पर अभ्यास मिले और फिर एक महंगा बोलिंग मशीन भी लगवाया ताकि वह अलग-अलग गति और अलग-अलग तरह के गेंदबाज़ों का सामना करने के लिए तैयार हो। अब सचिन सुबह स्टेडियम में और शाम को इनडोर ज़ोन में अभ्यास करता था।

इसी अभ्यास का फल सेमीफ़ाइनल में देखने को मिला। जब साउथ अफ़्रीकी तेज़ गेंदबाज़ों के बाउंसर गेंदों से भारत की युवा टीम के अन्य बल्लेबाज़ परेशान हो रहे थे, वहीं सचिन धस ने उन्हें बिना किसी ख़ास दिक्कत के खेला और 96 रन की संकटमोचक और मैच-जिताऊ पारी खेली।

सचिन की इस पारी की ख़ास बात उनकी शॉर्ट आर्म जैब रही, जिससे उन्होंने मिडविकेट एरिया में पांच चौके बंटोरे। इससे पहले नेपाल के ख़िलाफ़ सुपर-6 मैच में शतक लगाने के दौरान भी सचिन ने इस शॉट का प्रदर्शन किया था और मिडविकेट एरिया में सर्वाधिक रन बनाए थे।

कोच अज़हर बताते हैं कि उन्होंने साउथ अफ़्रीका की तेज़ और उछाल भरी विकेटों को देखते हुए शॉर्ट बाउंसर गेंदों पर सचिन की विशेष तैयारी करवाई थी।

“साउथ अफ़्रीका जाने से आठ दिन पहले तक वह मेरे साथ अभ्यास कर रहा था। हमने एक स्टील का प्लेट लिया और उसे बैक ऑफ़ लेंथ पर रखकर प्लास्टिक की गेंद से थ्रोडाउन गेंदबाज़ी की ताकि तेज़ गति से गेंद सचिन के शरीर पर जाए। इससे सचिन को कई बार चोट भी लगे, लेकिन वह डिगने वाला नहीं था।

पहले सचिन उन गेंदों को पुल मार रहा था, जिससे गेंद हवा में बहुत ऊपर जा रही थी और ताक़त व टाइमिंग कम होने के कारण उसे लंबाई नहीं मिल पा रही थी। फिर मैंने उसे गेंद को नीचे रखने को कहा, ग्राउंडेड पुल मारने की बात कही। हमने लगातार दो महीने तक अभ्यास किया और अब देखिए वह शुभमन गिल की तरह शॉर्ट आर्म जैब मार रहा है,” अज़हर कहते हैं।

अपने पिता की तरह सचिन भी तेंदुलकर के बहुत बड़े फ़ैन हैं। हालांकि उन्होंने बड़े होते हुए विराट कोहली को खेलते देखा है तो कोहली भी उनके फ़ेवरिट हैं। वैसे तो वह तेंदुलकर की तरह नंबर चार (टेस्ट मैचों में) पर बल्लेबाज़ी करते हैं, लेकिन इस टूर्नामेंट में उन्हें टीम प्रबंधन द्वारा फ़िनिशर का रोल दिया गया था, जिसे टीम की ज़रूरत समझते हुए सचिन ने स्वीकार किया और उसके साथ अभी तक न्याय किया है।

संजय अपने बेटे की इस तरक्की से बहुत ख़ुश हैं। उनकी इच्छा है कि उनका बेटा विश्व कप जीतकर आए और उसे उनके आदर्श तेंदुलकर का आशीर्वाद मिले। “यह सचिन नाम का ही आशीर्वाद है कि वह इतना अच्छा कर रहा है। भगवान (तेंदुलकर) का हाथ मेरे बेटे के सिर पर बना रहे और वह एक दिन इंडिया के लिए खेले,” भावुक संजय इसी इच्छा के साथ अपनी बातों को ख़त्म करते हैं।

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