sachin and dhoni: जब महेंद्र सिंह धोनी (M S Dhoni) को भारतीय टीम (Indian Team) की कप्तानी सौंपी गई थी। तब मैनेजमेंट सचिन तेंडुलकर (Sachin Tendulkar) को ही तीसरी बार टीम इंडिया (Team India) की कमान देना चाहती थी, पर मास्टर ब्लास्टर (Master Blaster) माही (Mahi) के नाम पर ही डटे रहे। साल 2007 के इंग्लैंड दौरे (England Tour) पर सचिन तेंदुलकर ने महेंद्र सिंह धोनी का नाम कप्तानी के लिए रिकमेंड किया था। उसी साल ODI विश्व कप (ODI World Cup) के पहले ही दौर में टीम इंडिया बांग्लादेश (Bangladesh) के हाथों हारकर बाहर हो गई थी।
Sachin and Dhoni: भारतीय टीम का खराब दौर

भारतीय टीम के इस तरह के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद देशभर में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद इंग्लैंड (ENG) दौरे पर भी टीम इंडिया का प्रदर्शन खराब रहा था। भारत (India) को 7 एक दिवसीय मैचों की सीरीज में 4-3 से हार मिली थी। और इस हार के बाद तो हिंदुस्तान में हाहाकार मच गया था। कप्तान राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) को हटाने की तैयारी कर ली गई थी। हालांकि बाद में उन्होंने खुद ही कप्तानी का पद छोड़ दिया था। अब नए कप्तान की तलाश शुरू हुई।
Sachin and Dhoni: सचिन 2 बार कप्तान बने
सचिन ने सबसे पहले साल 1996 में टीम इंडिया की कप्तानी संभाली थी। वह दिसंबर 1997 तक कप्तान रहे। इसके बाद साल 1999 में सचिन को दोबारा कप्तानी करने का अवसर मिला, लेकिन सचिन ने साल 2000 में टीम इंडिया की कप्तानी छोड़ दी थी। दरअसल जब भी टीम इंडिया का प्रदर्शन खराब होता था, सचिन को कप्तान बनाकर आलोचनाओं से बचने का प्रयास किया जाता था।
Sachin and Dhoni: भारतीय क्रिकेट के बड़े नाम सचिन

वह भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा नाम थे। किसी भी क्रिकेट फैन को बतौर कैप्टन सचिन तेंदुलकर के नाम पर आपत्ति नहीं होती थी। ऐसे में BCCI ने फैंस की नाराजगी से बचने के लिए 2007 में भी सचिन से कप्तानी संभालने की रिक्वेस्ट की। सचिन ने कहा- कि हमारे पास एक ऐसा लीडर है, जो अभी जूनियर है लेकिन आपको उसे करीब से देखना चाहिए।
Sachin and Dhoni: सचिन ने धोनी मे कप्तानी के गुण देखें

सचिन ने बताया कि मैं फर्स्ट स्लिप में फील्डिंग करता था और इस दौरान मैंने मैच की सिचुएशन पर कई दफा महेंद्र सिंह धोनी से बातचीत की थी। हालांकि टीम के कप्तान राहुल द्रविड़ थे, लेकिन धोनी की राय अक्सर सटीक होती थी। सचिन ने कहा था कि 26 वर्षीय महेंद्र सिंह धोनी की प्रतिक्रिया शांत, संतुलित और परिपक्व होती थी। अच्छी कप्तानी हमेशा अपोजिशन टीम से एक कदम आगे रहने के बारे में है।
अगर कोई ऐसा करने के लिए पर्याप्त तौर पर स्मार्ट है, तो फिर हमें उसे मौका जरूर देना चाहिए। जैसा कि हम अक्सर कहते हैं, जोश से नहीं बल्कि होश से खेलो। सचिन जानते थे कि आपको कभी लगातार 10 गेंद पर 10 विकेट नहीं मिल सकते। इसके लिए आपको पूरी तैयारी के साथ योजना बनानी होगी, तभी सफलता मिलेगी।
Sachin and Dhoni: दोनों की सोच एक सी
सचिन के जैसे धोनी का भी मानना था कि मैच के दिन के आखिर में असल मायना स्कोर बोर्ड रखता है। अगर प्रोसेस सही रखेगे, तो रिजल्ट जरूर अनुकूल आएगा। सचिन ने कहा कि मैंने ये सारे गुण महेंद्र सिंह धोनी के भीतर देखे थे। धोनी विकेट के पीछे खड़े होकर पूरा गेम चला सकते थे। सचिन ने बताया कि इसलिए मैंने BCCI और चयनकर्ताओं से बतौर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के नाम की सिफारिश की थी।
Sachin and Dhoni: सचिन के विश्वास पर खरे उतरे धोनी

sachin and dhoni: सचिन ने खुद को कप्तान बनाने की जगह देश हित में धोनी को यह जिम्मेदारी सौंप दी। हालांकि उस समय लोगों ने धोनी का विरोध किया, लेकिन सचिन अड़े रहे। सचिन ने यह साफ कर दिया था कि मैं तीसरी बार टीम इंडिया की कप्तानी नहीं संभालूंगा। बाद में महेंद्र सिंह धोनी सचिन के भरोसे पर पूरी तरह खरे उतरे और वो T-20 वर्ल्ड कप, ODI वर्ल्ड कप और ICC चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाले दुनिया के इकलौते कप्तान बन गए।

