Kranti Goud, Biography in Hindi, Domestic Career, WPL, Husband, Net worth, रफ़्तार की चाहत ने इन्हे 1 छोटे से गांव से यूपी वॉरियर्ज़ तक फिर Best टीम इंडिया मे पहुंचाया

Kranti Goud एक भारतीय क्रिकेटर हैं जो राष्ट्रीय टीम के लिए खेलती हैं। वह घरेलू क्रिकेट में मध्य प्रदेश और महिला प्रीमियर लीग में यूपी वारियर्स का प्रतिनिधित्व करती हैं।

इनका पूरा नाम क्रांति गौड़ है इनका जन्म 11 अगस्त, 2003 को छतरपुर घुवारा मध्य प्रदेश मे हुआ। अभी इनकी आयु करीब 22 वर्ष की है इनकी बल्लेबाजी शैली दाहिने हाथ के बल्लेबाज की है और इनकी गेंदबाजी शैली दाहिने हाथ के मध्यम तेज़ गेंदबाज की है टीम मे इनके खेलने की प्रमुख भूमिका गेंदबाज के रूप मे है। 

मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाके से आने वाली इस तेज़ गेंदबाज़ी ऑलराउंडर ने हर मौके़ को भुनाया और अब WPL का हिस्सा बनने जा रही हैं

सात साल पहले मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बुंदेलखंड क्षेत्र के छोटे से कस्बे घुवारा में महिलाओं के लेदर गेंद से खेले जाने वाले क्रिकेट मैच में एक टीम को एक खिलाड़ी की कमी थी। तभी उन्होंने एक लड़की को मैदान के आसपास छड़ी लिए घूमते देखा और उससे पूछा कि क्या वह खेलना चाहेगी। वह 14 साल की लड़की बचपन से टेनिस बॉल क्रिकेट खेलती आ रही थी और क्रिकेट के प्रति इतनी जुनूनी थी कि परीक्षा के दौरान भी डांट खाने की परवाह किए बिना खेलती थी।

लेकिन अब तक उसने सिर्फ़ टेनिस बॉल से लड़कों के साथ क्रिकेट खेला था। उसके पड़ोसियों और परिवार के जानने वालों को यह पसंद नहीं था, क्योंकि वे मानते थे कि गांव की लड़कियों के लिए क्रिकेट नहीं है। लेकिन न तो उस लड़की को और न ही उसके परिवार को इसकी परवाह थी। उसने बिना कोई मौका गंवाए अपने पहले लेदर की गेंद वाले मैच में हिस्सा लिया, बल्ले और गेंद से शानदार प्रदर्शन किया और प्लेयर ऑफ़ द मैच का पुरस्कार भी जीता।

21 वर्षीय क्रांति गौड़ अब एक तेज़ गेंदबाज़ी ऑलराउंडर हैं, जिन्होंने WPL 2025 के लिए UP वॉरियरज़ टीम में अपनी जगह बनाई है।

जब निलामी चल रहा था, तब गौड़ उस समय चंडीगढ़ में सीनियर विमेंस वनडे ट्रॉफ़ी खेल रही थीं और अपने मध्य प्रदेश की टीम के साथियों के साथ WPL 2025 की नीलामी देख रही थीं। एक दिन पहले ही उन्होंने छत्तीसगढ़ के ख़िलाफ़ 24 रन देकर 3 विकेट लिए थे, लेकिन नीलामी को लेकर उनकी उम्मीदें ज़्यादा नहीं थीं।

2024 में वह मुंबई इंडियंस की नेट गेंदबाज़ रही थीं और WPL का माहौल उन्हें बेहद पसंद आया था। जब उनका नाम अनकैप्ड खिलाड़ियों की सूची में आया, तो उन्हें उम्मीद नहीं थी कि कोई उन्हें ख़रीदेगा, लेकिन UP वॉरियरज़ ने उन्हें उनके बेस प्राइस 10 लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल कर लिया।

गौड़ उस पल को याद करते हुए कहती हैं, “जब UP वॉरियरज़ ने मेरा नाम लिया, तो मेरी आंखों में आंसू आ गए। मैंने तुरंत अपने परिवार को फ़ोन किया और अपने सबसे बड़े भाई मयंक सिंह से बात की।”

(क्रांति अपने छह भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं–तीन भाई और तीन बहनें।) “वह नीलामी देख रहे थे और इसका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। पहले तो वह बहुत भावुक हो गए और हम ठीक से बात भी नहीं कर पाए। मैंने थोड़ी देर बाद फिर से फ़ोन किया, तब वह रोने लगे और मैं भी खु़द को रोक नहीं पाई।

“गांव में लोग कहते थे कि लड़की है, इसे क्रिकेट मत खेलने दो। लेकिन मेरे भाई ने किसी की नहीं सुनी, उन्होंने मुझे पूरा समर्थन दिया। परिवार ने भी मेरा साथ दिया और इसी वजह से मैं आज यहां तक पहुंची हूं।”

“नीलामी में चुने जाने के बाद मेरे दिमाग़ में सबसे पहली बात यही आई कि मैं सीनियर वनडे टूर्नामेंट में अच्छा कर रही थी, तो बस उसी फ़ॉर्म को WPL में भी जारी रखना है। साथ ही मैं भारतीय खिलाड़ियों से मिलने और उनके साथ खेलने को लेकर भी काफ़ी उत्साहित हूं।”

अपना पहला लेदर बॉल मैच खेलने के बाद, क्रांति गौड़ टीकमगढ़ जिले के जतारा कस्बे में एक और मैच खेलने गईं, जो लगभग 70 किमी दूर था। वहां भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। वहीं पर छतरपुर ज़िला क्रिकेट एसोसिएशन (CDCA) के सचिव और सागर डिवीज़न के कोच राजीव बिलथरे की सबसे पहले उनकी प्रतिभा पर नज़र पड़ी। वह साई क्रिकेट अकादमी चलाते हैं।

राजीव कहते हैं, “वह तेज़, फुर्तीली और बेहद एथलेटिक थीं। मुझे लगा कि वह आगे अच्छा कर सकती हैं, इसलिए मैंने उनके पिता से कहा कि उन्हें मेरे पास छतरपुर में छोड़ दें। मैंने उनसे कहा कि मैं उनकी बेटी को एक अच्छा खिलाड़ी बनाऊंगा।

उनके पिता ने मुझसे कहा, ‘हम अपनी बेटी आपको सौंप रहे हैं। आपको ही इसका भविष्य बनाना है।’ यह पूरी तरह से उनकी मेहनत और प्रतिभा का नतीजा है कि वह आज यहां तक पहुंची हैं। मैं बस जो कर सकता था, वह किया। उनका परिवार आर्थिक रूप से बहुत मज़बूत नहीं था। इसलिए मैंने उनकी थोड़ी मदद की–किट, ड्रेस या बल्ले के मामले में जो भी मदद हो सकती थी, वह मैंने किया।”

भारत में ज़्यादातर युवा क्रिकेट का बल्ला ही उठाते हैं। बल्लेबाज़ हमेशा से जनता की कल्पना पर राज करते आए हैं–सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, मिताली राज, विराट कोहली, हरमनप्रीत कौर, स्मृति मांधना। फिर क्रांति ने तेज़ गेंदबाज़ी को कैसे चुना?

वह हंसते हुए कहती है, “ये बस हो गया। जब मैंने टेनिस बॉल से खेलना शुरू किया, तो देखा कि सभी दौड़कर मध्यम गति की गेंदबाज़ी कर रहे थे। मुझे तब यह भी नहीं पता था कि स्पिन गेंदबाज़ भी होते हैं। टेनिस बॉल क्रिकेट में स्पिनर कहां होते हैं?

मेरे भाई ने भी कहा कि मुझे मध्यम गति की गेंदबाज़ी करनी चाहिए, तो मैंने वही किया। जब मैं (राजीव बिलथरे की) अकादमी में आई, तो देखा कि वहां ज़्यादा मध्यम गति के गेंदबाज़ नहीं थे। वहां सिर्फ़ एक ही ऐसी गेंदबाज़ थीं – सुषमा विश्वकर्मा, जो मेरी दोस्त बन गईं। उन्होंने भी मुझे तेज़ गेंदबाज़ी जारी रखने को कहा, और उसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।”

इसी दौरान, जब 2017 में भारतीय महिला टीम ने वनडे वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में जगह बनाई, तब मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने अंडर-16 महिला क्रिकेट टूर्नामेंट शुरू किया। पहले ज़िला स्तर पर टीमों के बीच मुकाबले हुए, जिनमें से राज्य टीम के लिए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का चयन किया गया।

सागर डिवीज़न में सागर, छतरपुर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले आते हैं, के क्रिकेट ऑपरेशन्स मैनेजर सत्यम त्रिपाठी ने बिलथरे की मदद से महिला टीम बनाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने विभिन्न स्कूलों में जाकर जागरूकता अभियान चलाया, माता-पिता से संपर्क किया और 40 से ज़्यादा लड़कियों को अकादमी तक लाने में सफल रहे, जिनमें से 15 को सागर डिवीज़न के लिए चुना गया।

त्रिपाठी बताते हैं, “हमने अंतर-जिला अंडर-16 टूर्नामेंट आयोजित किया, जिसमें क्रांति ने छतरपुर ज़िले से खेला। वह टीम की कप्तान थीं और हर विभाग में बेहतरीन प्रदर्शन किया। इसके बाद हमने उन्हें सागर डिवीज़न का कप्तान बनाया, और 2018-19 के अंडर-16 टूर्नामेंट में, जो एमपीसीए ने आयोजित किया था, हमारी टीम उपविजेता बनी।

आमतौर पर इंदौर, ग्वालियर और भोपाल की टीमें ही ज़्यादा हावी रहती थीं, इसलिए सागर डिवीज़न के लिए टूर्नामेंट में एक-दो जीत भी बड़ी बात होती थी। लेकिन क्रांति ने हमारी टीम को उपविजेता तक पहुंचाया–भोपाल चैंपियन बना–और वहीं से उनके करियर की असली शुरुआत हुई।”

गौड़ के पास हमेशा से अच्छी गति थी। उनकी दुबली-पतली काया उन्हें तेज़ दौड़ने और गति से गेंद फेंकने में मदद करती थी। टेनिस बॉल क्रिकेट में उनकी गेंदों में जो धार होती थी, वह बल्लेबाज़ों को चौंका देती थी। लेदर बॉल से वह दोनों ओर स्विंग करा सकती हैं।

इस सीज़न के सीनियर महिला वनडे ट्रॉफ़ी फ़ाइनल में भी उन्होंने यह कौशल दिखाया। उन्होंने फ़ाइनल में 25 रन देकर 4 विकेट झटके, जिसमें भारतीय विकेटकीपर ऋचा घोष को बोल्ड करना भी शामिल था। इस प्रदर्शन की बदौलत मध्य प्रदेश ने पहली बार यह ट्रॉफ़ी जीती।

राजीव कहते हैं, “उनके पास कम उम्र में ही वह गति थी, जो उस समय की ज़्यादातर लड़कियों में नहीं थी। जब वह दौड़ती थीं, तो लड़कों के बराबर की स्पीड रहती थी। मुझे तभी लग गया था कि वह असाधारण हैं। इसलिए हमने उनकी फ़िटनेस पर ध्यान दिया और गेंदबाज़ी ड्रिल्स करवाईं। वह बहुत मेहनती हैं। अगर वह मैदान में तीन घंटे हैं, तो हर मिनट कुछ न कुछ काम करेंगी, कभी सुस्ताने या गपशप करने में समय बर्बाद नहीं करेंगी।”

सीडीसीए और सागर डिवीज़न में, बिलथरे ने हमेशा खिलाड़ियों को हरफ़नमौला बनाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने गौड़ में एक अच्छे बल्लेबाज़ की झलक देखी–उनके पास ताक़त थी और वह स्पिन के ख़िलाफ़ तेज़ी से अपने पैरों का इस्तेमाल कर सकती थीं। उन्होंने उनकी तकनीक को सुधारने में मदद की और “वी” क्षेत्र में शॉट खेलने की अहमियत सिखाई। बिलथरे की नियमित ट्रेनिंग के कारण गौड़ ने अपनी बल्लेबाज़ी में काफ़ी सुधार किया। लेकिन एक कमी थी–धैर्य।

राजीव कहते हैं, “पहले वह हर गेंद पर बड़ा शॉट मारना चाहती थीं। मैंने उनसे धैर्य पर काम करने के लिए कहा और मेडिटेशन करवाया। मैचों के दौरान हमने उनसे कहा कि हर गेंद के बाद डगआउट की तरफ़ देखें, और हम उन्हें इशारों से बताते थे कि संयम रखना है।

धीरे-धीरे उन्होंने हमारे कहे अनुसार खेलना शुरू किया और यह उनकी आदत बन गई। जब तक कोई बल्लेबाज़ यह मानसिकता विकसित नहीं करता, तब तक वह अच्छी बल्लेबाज़ी नहीं कर सकता। अब यह उनका स्वाभाविक खेल बन गया है–हमें अब उन्हें बताने की ज़रूरत नहीं पड़ती कि किस परिस्थिति में कैसे खेलना है।”

इसका एक बेहतरीन उदाहरण पिछले सीज़न के अंडर-23 महिला वनडे ट्रॉफ़ी क्वार्टर-फ़ाइनल में दिखा। बंगाल के ख़िलाफ़ मध्य प्रदेश की टीम 35वें ओवर में 106 पर 5 विकेट खो चुकी थी। इसके बाद उन्होंने 42 गेंदों में संयमित 46 रन बनाए और टीम का स्कोर 182/9 तक पहुंचाया। यह स्कोर जीत के लिए काफ़ी नहीं था, लेकिन यह पारी गौड़ के लिए गर्व का क्षण रही।

वह हंसते हुए कहती हैं, “मेरा स्वाभाविक खेल T20 के अंदाज़ में बल्लेबाज़ी करना है। भले ही मैं वनडे खेल रही हूं। जब मैं 50 ओवर के मैच में बल्लेबाज़ी करने जाती हूं, तो मेरी टीम बस यही उम्मीद करती है कि मैं कोई अजीब शॉट न खेलूं। पिछले साल अंडर-23 वनडे क्वार्टर-फ़ाइनल में हमारी टीम जल्दी विकेट खो चुकी थी, तो मुझे लगा कि कुछ अलग करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि बहुत सारे ओवर बचे थे। मैंने इंतज़ार किया, लेकिन जो गेंद स्लॉट में आई, उसे ज़रूर मारा।”

आज भी हर मैच से पहले और बाद में गौड़ और राजीव बातचीत करते हैं। वहीं वॉरियर्ज़ में सायमा ठाकोर उनकी मार्गदर्शक बनी हैं, जो उन्हें मैच सिमुलेशन और अलग-अलग परिस्थितियों में गेंदबाज़ी करने की बारीकियां सिखा रही हैं।

पूरे देश में WPL का एक बड़ा असर यह हुआ है कि ज़्यादा लड़कियां प्रोफे़शनल क्रिकेट अकादमी से जुड़ने लगी हैं। राजीव की अकादमी में भी ऐसा ही बदलाव आया है, और वह इसका श्रेय गौड़ की सफलता को देते हैं। “क्रांति के आगे बढ़ने के बाद बदलाव साफ़ दिखा है। वह स्थानीय खिलाड़ी हैं, हर कोई उन्हें जानता है। अब लोग यह मानने लगे हैं कि अगर वह मेरी अकादमी से निकलकर राज्य और WPL की टीम तक पहुंच सकती हैं, तो वे भी कोशिश कर सकते हैं।”

Kranti Goud
Kranti Goud

गौड़ की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि गांवों की लड़कियां भी क्रिकेट खेल सकती हैं और उन्हें खेलना भी चाहिए।

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Kranti Goud का घरेलू करियर

गौड़ मध्य प्रदेश महिला क्रिकेट टीम के लिए घरेलू क्रिकेट खेलती हैं। उन्होंने बंगाल के खिलाफ 2024-25 सीनियर महिला वन डे ट्रॉफी के फाइनल में 4 विकेट लिए। वह मध्य प्रदेश अंडर-23 टीम के लिए भी खेली।

दिसंबर 2024 में तीसरी WPL नीलामी में, गौड़ को UP वारियर्स फ्रैंचाइज़ी ने ₹ 10 लाख में खरीदा था। वह 2023 में इस्सी वोंग के बाद WPL में चार विकेट लेने वाली दूसरी सबसे कम उम्र की क्रिकेटर बन गईं। उनका पहला WPL विकेट मेग लैनिंग का क्लीन बोल्ड था।

Kranti Goud  का अंतर्राष्ट्रीय करियर

अप्रैल 2025 में, उन्हें 2025 श्रीलंका महिला त्रिकोणीय श्रृंखला में काशवी गौतम के प्रतिस्थापन खिलाड़ी के रूप में राष्ट्रीय टीम में चुना गया था। उन्होंने 11 मई 2025 को श्रीलंका के खिलाफ त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल में अपना वनडे डेब्यू किया। मई 2025 में, उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ श्रृंखला के लिए वनडे और टी20ई टीम में नामित किया गया था।

Kranti Goud को मिला टीम इंडिया मे खेलने का मौका

टीम इंडिया से नए खिलाड़ी को खेलने का मौका मिला है. ये खिलाड़ी मध्य प्रदेश है और बतौर गेंदबाज रफ्तार इसकी सबसे बड़ी ताकत है. इस खिलाड़ी की किस्मत 70 किलोमीटर से चमकी है. क्या है 70 km की ये कहानी आइए जानते हैं.

फिल्म ‘चक दे इंडिया’ में शाहरुख खान का 70 मिनट वाला डायलॉग हर जुबान पर चढ़ गया था. लेकिन, हम यहां उस 70 मिनट की नहीं बल्कि 70 किलोमीटर की बात करने वाले हैं. ये वो 70 किलोमीटर हैं, जिसके फासले पर एक खिलाड़ी का बेजोड़ खेल देखकर कोच को उसकी काबिलियत का अंदाजा हो गया था. और, आज कोच का वो भरोसा यानी कि वो खिलाड़ी टीम इंडिया में हैं. उसे खेलने का मौका मिला है. हम बात कर रहे हैं क्रांति गौड़ की.

Kranti Goud ने ट्राई नेशन सीरीज के फाइनल में किया डेब्यू

21 साल की क्रांति गौड़ दाएं हाथ की तेज गेंदबाज हैं. टीम इंडिया में उन्हें श्रीलंका में चल रही महिला ट्राई नेशन सीरीज के लिए चुना गया. और, कमाल की बात देखिए कि इस ट्राई नेशन सीरीज में उनका डेब्यू सीधे फाइनल मुकाबले में हुआ है. ये भी क्रांति गौड़ पर टीम मैनेजमेंट के भरोसे को ही बताता है।

Kranti Goud के 70 KM ने किया तकदीर का फैसला!

अब सवाल है कि मध्यप्रदेश की रहने वाली क्रांति गौड़ के टीम इंडिया तक पहुंचने का सफर कैसे संभव हुआ? उनकी कामयाबी की ये गाड़ी टीम इंडिया तक सीनियर वनडे टूर्नामेंट और WPL, जहां उन्हें 10 लाख रुपये में यूपी वॉरियर्ज ने खरीदा था, से होते हुए पहुंची. हालांकि, इन सबसे अगर उनके लिए तकदीर बदलने वाली स्टोरी कोई रही, तो वो थी उस 70 किलोमीटर का फासले की कहानी. सब कुछ दरअसल क्रांति गौड़ के लिए वहीं से शुरू हुआ।

लेदर बॉल से खेले मैच में पहली बार यादगार परफॉर्मेन्स देने के बाद क्रांति गौड़ को दूसरे मैच के लिए 70 किलोमीटर दूर जतारा जाना पड़ा, जो कि टीकमगढ़ जिले में एक छोटा सा शहर है. पहले मैच की सफलता को क्रांति ने जतारा में खेल दूसरे लेदर बॉल मैच में भी दोहराई. और, यहीं पर छत्तरपुर जिला क्रिकेट संघ के सेक्रेटरी और सागर डिवीजन के कोच राजीव बिलथरे की नजर उन पर पड़ी।

क्रांति की स्पीड देखकर राजीव बिलथरे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उसका दाखिला अपने साई क्रिकेट एकेडमी में करा लिया. इसके लिए राजीव बिलथरे ने क्रांति गौड़ के पिता से बात की और बेटी को छत्तरपुर में ही छोड़ने को कहा. “हम अपनी बेटी को आपको सौंप रहे हैं”, ये कहते हुए क्रांति गौड़ के पिता राजीव बिलथरे की बातों से सहमत हो गए  इसके बाद क्रांति गौड़ ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. वो आगे ही बढ़ती गईं।

Kranti Goud को समाज के ताने मिले पर परिवार के सपोर्ट से बनी क्रिकेटर

6 भाई-बहनों में सबसे छोटी क्रांति गौड़ को क्रिकेटर बनने के लिए समाज के तानों का भी सामना करना पड़ा. लेकिन उनके परिवार ने उनका पूरा सपोर्ट किया. अपनी मेहनत और परिवार के सपोर्ट के दम पर ही क्रांति गौड़ आज जहां हैं, वहां तक पहुंच सकी हैं।

Kranti Goud की टीमें

भारत महिला

मध्य प्रदेश महिला

यूपी वारियर्स महिला

Kranti Goud वनडे गेंदबाजी करियर आँकड़े

प्रारूपमैचपारीगेंदरनविकेटबेस्टऔसतइकोनोमीस्ट्राइक
वनडे113022000.004.400.00

Kranti Goud वनडे बल्लेबाजी करियर आँकड़े

प्रारूपमैचपारीनॉटरनबेस्टऔसतगेंदस्ट्राइकशतक
वनडे111000.0010.000

Kranti Goud डब्ल्यूपीएल टी20 गेंदबाजी आँकड़े

टीममैचपारीगेंदरनविकेटबेस्टऔसतइकोनोमीस्ट्राइक4विकेट
यूपीडब्ल्यू-8813220864/2534.669.4522.01

Kranti Goud डब्ल्यूपीएल टी20 बल्लेबाजी आँकड़े

टीममैचपारीनॉटरनबेस्टऔसतगेंदस्ट्राइकशतक
यूपीडब्ल्यू-84485*0.007114.280

Kranti Goud के हाल के मैच

IND महिला बनाम SL महिला 0* 0/22 11-मई-2025 कोलंबो WODI

UPW महिला बनाम RCB महिला — 0/35 08-मार्च-2025 लखनऊ WT20

UPW महिला बनाम MI महिला 1* 1/31 06-मार्च-2025 लखनऊ WT20

UPW महिला बनाम GG महिला 0* 1/46 03-मार्च-2025 लखनऊ WT20

UPW महिला बनाम MI महिला 5* 0/8 26-फरवरी-2025 बेंगलुरु WT20

Kranti Goud का डेब्यू/आखिरी मैच

वनडे मैच

इंडियन महिला बनाम श्रीलंका महिला कोलंबो में (आरपीएस) – 11 मई, 2025

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Kranti Goud की प्रोफ़ाइल

क्रांति गौड़ एक मध्यम तेज़ गेंदबाज़ हैं जो 2025 महिला प्रीमियर लीग में वास्तव में अपना नाम बना रही हैं। मूल रूप से ग्रामीण मध्य प्रदेश से, गौड़ टेनिस बॉल क्रिकेट खेलते हुए बड़ी हुई हैं। उन्हें उनके कोच द्वारा दिन में केवल एक सलाह दी जाती थी – तेज़ दौड़ो और तेज़ गेंदबाज़ी करो।

यही वह सीज़न था जिसे क्रांति गौड़ ने अपने क्रिकेट करियर में आगे बढ़ाया। उन्होंने 2024 महिला सीनियर वन डे कप में 17 विकेट लिए, जिसमें फ़ाइनल में 4/25 शामिल थे, जिसमें मध्य प्रदेश ने ट्रॉफी जीती। गौड़ 2024 सीज़न में यूपी वारियर्स के लिए नेट बॉलर थीं, और अगले साल उन्हें बेस प्राइस पर एक खिलाड़ी के रूप में चुना गया।

Kranti Goud ने श्रीलंका के खिलाफ किया डेब्यू

श्रीलंका के कोलंबो स्थित आर प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए महिला त्रिकोणीय सीरीज के फाइनल मुकाबले में भारत ने श्रीलंका को 97 रनों से हराया। इसी मैच में क्रांति ने टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया और अपने पहले ही मैच में शानदार गेंदबाजी कर सभी का ध्यान खींचा।

छतरपुर जिले के छोटे से कस्बे घुवारा की बेटी क्रांति गौड़ ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर की ऐतिहासिक शुरुआत करते हुए देश, प्रदेश और पूरे बुंदेलखंड का नाम रोशन किया। श्रीलंका के कोलंबो स्थित आर प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए महिला त्रिकोणीय सीरीज के फाइनल मुकाबले में भारत ने श्रीलंका को 97 रनों से हराया। इसी मैच में क्रांति ने टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया और अपने पहले ही मैच में शानदार गेंदबाजी कर सभी का ध्यान खींचा।

Kranti Goud को स्मृति मंधाना से मिली कैप

टीम की सीनियर खिलाड़ी स्मृति मंधाना ने क्रांति को डेब्यू कैप देकर भारतीय महिला टीम का हिस्सा बनाया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 342 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसमें मंधाना की 116 रनों की शतकीय पारी के साथ हरलीन देओल (47), जेमिमा रोड्रिग्स (44) और हरमनप्रीत कौर (42) का अहम योगदान रहा।जवाब में श्रीलंका की टीम 245 रनों पर ढेर हो गई। क्रांति गौड़ ने 5 ओवर में मात्र 22 रन खर्च करते हुए दबाव बनाया और श्रीलंका की कप्तान चमारी अट्टापट्टू तथा स्टार बल्लेबाज नीलाक्षी डी सिल्वा को अपनी सटीक गेंदबाजी से परेशान किया।

Kranti Goud की सफलता से छतरपुर में जश्न का माहौल

क्रांति गौड़ की इस उपलब्धि से न केवल घुवारा बल्कि छतरपुर, बुंदेलखंड और पूरा मध्यप्रदेश गौरवान्वित है। लोगों ने इसे बुंदेलखंड की बेटी का कमाल बताया और सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ आ गई। खेल प्रेमियों और समाजसेवियों ने क्रांति की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हर बेटी के लिए प्रेरणा बताया। क्रांति के इस प्रदर्शन से 2025 महिला क्रिकेट विश्व कप से पहले टीम इंडिया को एक मजबूत गेंदबाज मिल गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह डेब्यू टीम की डेथ ओवर गेंदबाजी में नई ऊर्जा और विकल्प प्रदान करेगा।

Kranti Goud को लखनऊ वॉरियर्स ने इतने बेस प्राइस पर खरीदा

वूमेन प्रीमियर लीग ( WPL 2025) के लिए सागर की एक बेटी का चयन भी हुआ है. सागर क्रिकेट डिवीजन में सीनियर टीम की कप्तान क्रांति गौड़ को लखनऊ वॉरियर्स ने 10 लाख की बेस प्राइस पर अपनी टीम में शामिल किया है. क्रांति का पिछले साल मुंबई इंडियंस की टीम में नेट बॉलर के रूप में चयन किया गया था. 19 साल की क्रांति ऑलराउंडर खिलाड़ी हैं. वह राइट हैंड बैट्समैन और राइट आर्म बॉलर हैं. क्रांति सागर डिवीजन की पहली ऐसी क्रिकेटर हैं, जिनका WPL में चयन हुआ है.

Kranti Goud ने महिला सीनियर टीम में अच्छा प्रदर्शन किया

सागर डिवीजन के ऑफिस इंचार्ज सत्यम त्रिपाठी ने बताया कि क्रांति गौड़ ने छतरपुर डिस्ट्रिक्ट से अपने क्रिकेट की शुरुआत की. क्रांति ने सागर डिवीजन की गर्ल्स अंडर-16 टीम को अपनी कप्तानी में फाइनल तक पहुंचाया था और टीम उपविजेता रही थी. क्रांति मध्य प्रदेश की अंडर-16, अंडर-19, अंडर-23 और सीनियर टीमों में लगातार अपने अच्छे प्रदर्शन के कारण शामिल होती रही है.

Kranti Goud का इंडिया टीम में खेलने का सपना

क्रांति ने Local 18 को फोन पर बताया कि वह इस समय मध्य प्रदेश महिला सीनियर टीम की सदस्य हैं. सागर क्रिकेट डिवीजन सीनियर टीम की कप्तान हैं. मूल रूप से छतरपुर के एक छोटे से गांव घुवारा की रहने वाली हैं. पिता संतोष सिंह पुलिस में कांस्टेबल रहे हैं. क्रांति तीन भाई और तीन बहन हैं, जिसमें वह सबसे छोटी हैं. आगे बताया कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने पर भी हमेशा परिवार का सपोर्ट मिलता रहा, जिसकी वजह से लगातार आगे बढ़ रही हैं. आगे चलकर वह इंडिया टीम में खेलना चाहती हैं.

Kranti Goud घर के सामने क्रिकेट देखती थी

क्रिकेट की दीवानगी को लेकर क्रांति बताती हैं कि जब वह अपने गांव में थी, तब उनके घर के बाहर एक मैदान था. जिसमें टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलने गांव के भैया लोग आते थे. जिनके साथ उन्होंने क्रिकेट खेलना सीखा था. तब गांव वाले तंज भी कसते थे. 2017 में लेदर क्रिकेट टूर्नामेंट हुआ, एक खिलाड़ी की कमी थी तब उस टीम में क्रांति को जगह मिल गई. इसमें उन्होंने ऐसा हुनर दिखाया कि MPCA से जुड़े छतरपुर के राजीव शर्मा ने उनसे प्रोफेशनल क्रिकेट खेलने को कहा और कोचिंग देने लगे.

Kranti Goud ने बढ़ाया मान

कुछ समय बाद क्रांति सागर डिवीजन में आईं. यहां क्रांति की प्रतिभा को देखते हुए मौका दिया और पहले ही साल में कप्तान बना दिया. इसके बाद क्रांति ने अपनी टीम को जीतना सिखाया. आज उनका वूमेन प्रीमियर लीग में चयन होने पर सागर डिवीजन के सभी स्टाफ और पदाधिकारी बेहद खुश हैं और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं.

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