Praveen Kumar: आज हम बात करेगे उस खिलाड़ी की, जिसने चोट को छिपाकर साल 2011 वर्ल्ड कप (Year 2011 World Cup) खेलना उचित नहीं समझा था। उसने BCCI और चयनकर्ताओं से सच कह दिया, और वर्ल्ड कप (WC) खेलने का मौका खो दिया। जी हाँ, बात बहुत ही उसूल के पक्के भारत (India) के पूर्व तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार (Praveen की हो रही है।
पाकिस्तान के विरुद्द 2007 में डेब्यू (debut) करने वाले प्रवीण कुमार का क्रिकेट करियर बेहतरीन रहा। प्रवीण कुमार ने 68 वनडे में 77 और 6 टेस्ट में 27 विकेट चटकाए हैं। वनडे में उनका बेस्ट 31 रन देकर 5 विकेट है, वहीं टेस्ट में 106 रन देकर 5 विकेट टेस्ट में प्रवीण कुमार का बेस्ट परफॉर्मेंस है।
Praveen Kumar को अनफिट और सिरफिरा क्रिकेटर रेफरी ने बताया

कॉरपोरेट ट्रॉफी (Corporate Trophy) के दौरान ओएनजीसी और आयकर विभाग (ONGC and Income Tax Department) के बीच खेले गए एक मैच में बल्लेबाज अजीत अर्गल (Ajit Argal) से प्रवीण कुमार उलझ पड़े। इसके बाद धमकाने और अपमानित करने का दोषी पाए जाने के बाद रेफरी ने कुमार को मानसिक तौर पर अनफिट और सिरफिरा क्रिकेटर बताया था।
एक ओवर के दौरान प्रवीण कुमार ने अजितेष (Ajitesh) को दो बाउंसर फेंकी, फिर शॉर्ट बॉल डाली। इसके बाद अजितेष ने मैदान अंपायर कमलेश शर्मा (Kamlesh Sharma) से शिकायत की कि आखिर वे नो बॉल क्यों नहीं दे रहे। इतना कहना था कि प्रवीण कुमार गुस्से से लाल हो उठे और सीधे बल्लेबाज पर भड़ास निकाली।
Praveen Kumar स्विंग गेंदबाजी के जादूगर
पागल करार दिए जाने के कुछ समय बाद प्रवीण ने कहा था, एक समय ऐसा आया जब मैंने असल में घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था। मैं सोचता था कि लोग मुझसे क्या बात करेंगे। डर लगता था कि वे मुझसे कैसे-कैसे सवाल पूछेंगे, लेकिन धीरे-धीरे मैंने बाहर निकलना शुरू किया और सारी नकारात्मकता समाप्त हो गई। प्रवीण कुमार मध्यम गति के तेज गेंदबाज थे। प्रवीण कुमार अपनी स्विंग गेंदबाजी के लिए मशहूर थे।
Praveen Kumar: विश्वकप 2011 मे चोट की वजह से बाहर

एक इन्टरव्यू में प्रवीन कुमार ने बताया कि उनको विश्वकप 2011 की भारतीय टीम में भी चुना गया था लेकिन उन्होने अपनी चोट की वजह से टीम से बाहर होने का फैसला कर लिया था। ऐसा उन्होने इसलिए किया क्योंकि वह चोट छिपाकर अपनी टीम का नुकसान नही करना चाहते थे। प्रवीण कुमार के पास गति नहीं थी। वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने में माहिर थे, जिसकी वजह से उन्होने दुनिया के नामी बल्लेबाजों को भी परेशान किया और आउट भी किया था।
प्रवीण कुमार का इंटरनेशनल करियर अच्छा चल रहा था और वह टीम के लिए बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे थे। इस बीच प्रवीन कुमार को साजिश के तहत बदनाम किया गया और अंततः चोटों की वजह से उनको टीम से भी बाहर कर दिया गया था।
Praveen Kumar डिप्रेशन मे चले गए थे
एक बेहतरीन स्विंग गेंदबाज जिन्होंने बहुत ज्यादा गति न होने के बावजूद बेहतरीन प्रदर्शन किया उनको एक समय अकेला छोड़ दिया गया था। एक वक्त ऐसा भी आया था कि जब Praveen Kumar अवसाद में चले गये थे। कहा जाता है कि वह आत्महत्या भी कर लेना चाहते थे। सच ही कहा गया है कि वक्त खराब हो तो कोई भी साथ नहीं देता।
Praveen Kumar को किसी का साथ नहीं मिला?
Praveen Kumar ने भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) की इतनी सेवा की, लेकिन आज प्रवीन कुमार अकेले तन्हा हैं। उनके साथ खेलने वाले उनके साथी आज किसी IPL टीम के कोई कोच, मेंटॉर या कॉमेंटेटर (Any Coach, Mentor or Commentator of the IPL Team) बन गए हैं, लेकिन प्रवीण कुमार आज भी खाली हैं।
आखिर जब विक्रम राठौर (Vikram Rathore) जैसे पूर्व खिलाड़ी भारतीय टीम (Indian Team) के बल्लेबाजी कोच हो सकते हैं, तो प्रवीण कुमार किसी आईपीएल टीम (IPL Team) के गेंदबाजी कोच क्यों नही हो सकते हैं? अपना सम्पूर्ण जीवन क्रिकेट को समर्पित कर देने वाले प्रवीण कुमार इतना भी डिजर्व नहीं करते क्या?

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