Nuzhat Parween, Biography in Hindi, Domestic Career, WPL, Husband, Net worth, “छोटे शहर से आई 1 क्रिकेटर की बड़ी उड़ान: “पहले एथलीट फिर फुटबॉल अब क्रिकेट बना करिअर”

Nuzhat Parween भारतीय महिला क्रिकेट टीम की एक जानी-मानी विकेटकीपर-बल्लेबाज़, उन चंद खिलाड़ियों में से हैं जिन्होंने छोटे से शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से आने वाली नुज़हत की कहानी संघर्ष, समर्पण और आत्मविश्वास का एक जीवंत उदाहरण है। फुटबॉल की राष्ट्रीय खिलाड़ी से क्रिकेट की चमकदार दुनिया तक उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना साकार हो सकता है।

Nuzhat Parween भारतीय महिला क्रिकेट टीम की एक विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं। उनका जन्म 9 मई 1996 को सिंगरौली, मध्य प्रदेश में हुआ था। नुज़हत ने 2017 में आयरलैंड के खिलाफ वनडे में और 2016 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 में पदार्पण किया था। वह 2017 महिला क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा थीं।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा:

Nuzhat Parween का जन्म सिंगरौली, मध्य प्रदेश में हुआ था। उनके पिता मसीह आलम कोल खदान में मशीन ऑपरेटर हैं और मां नसीमा बेगम गृहणी हैं। नुज़हत ने अपनी स्नातक की पढ़ाई दिल्ली से की है।

क्रिकेट करियर:

Nuzhat Parween ने 2011 में सिंगरौली महिला क्रिकेट टीम में शामिल होकर क्रिकेट खेलना शुरू किया।

उन्होंने 2015 में सीनियर इंटर जोनल टूर्नामेंट में 101 रन की नाबाद पारी खेली।

उनका चयन मध्य प्रदेश की अंडर-19 टीम में हुआ।

2017 में, उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ वनडे में और वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 में पदार्पण किया।

वह 2017 महिला क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा थीं, जहां टीम इंग्लैंड से हार गई थी।

वह वर्तमान में रेलवे के लिए खेलती हैं और वेस्टर्न रेलवे में नौकरी भी करती हैं।

अन्य जानकारी:

Nuzhat Parween एक प्रतिभाशाली क्रिकेटर होने के साथ-साथ एक फुटबॉल खिलाड़ी भी रही हैं।

उन्होंने मध्य प्रदेश की अंडर-16 फुटबॉल टीम का भी प्रतिनिधित्व किया है।

नुज़हत को भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाने वाली रीवा संभाग की पहली महिला क्रिकेटर होने का गौरव प्राप्त है।

उनके परिवार ने हमेशा उनका समर्थन किया है, खासकर उनके पिता और भाई ने, जो विदेश में रहते हैं।

Nuzhat Parween एक भारतीय क्रिकेटर हैं जो विकेटकीपर के रूप में खेलती हैं। घरेलू स्तर पर, वह महिला सीनियर वन डे ट्रॉफी और महिला सीनियर टी20 ट्रॉफी में रेलवे के लिए खेलती हैं। एक बहुमुखी प्रतिभाशाली एथलीट, वह मध्य प्रदेश अंडर-16 फुटबॉल टीम की पूर्व फुटबॉल कप्तान हैं, वह 2011 में सिंगरौली की जिला क्रिकेट टीम में शामिल हुईं। उन्होंने नवंबर 2016 में वेस्टइंडीज के खिलाफ ट्वेंटी-20 अंतर्राष्ट्रीय श्रृंखला में भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए पदार्पण किया।

Nuzhat Parween का प्रारंभिक जीवन

Nuzhat Parween
Nuzhat Parween

नुज़हत, मसीह आलम और नसीमा बेगम की बेटी हैं। उनके चार भाई-बहन हैं – बड़े भाई आमिर सोहेल, बड़ी बहन नेमत परवीन, छोटी बहन आसिया परवीन और छोटा भाई अयान अशरफ सोहेल।

उनका जन्म सिंगरौली में हुआ था और वे मध्य प्रदेश और सेंट्रल ज़ोन के लिए घरेलू क्रिकेट खेलती थीं। अब वे रेलवे के लिए खेलती हैं।

Nuzhat Parween बचपन से ही अपने सहपाठियों के साथ गली क्रिकेट खेलती थीं। क्रिकेट में आने से पहले, उन्होंने राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया था और राज्य एथलेटिक्स (100 मीटर) में स्वर्ण पदक विजेता थीं। उनका परिवार उनकी खेल गतिविधियों का भरपूर समर्थन करता था, लेकिन उन्हें सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा। नुज़हत के अनुसार, 2017 विश्व कप में भाग लेने के बाद यह स्थिति बदल गई।

नुज़हत के अनुसार, फुटबॉल के अनुभव ने उनकी सहनशक्ति और ताकत को बढ़ाया, जिससे उन्हें विकेटकीपर के रूप में मदद मिली। 2012 में, एक टूर्नामेंट में उनकी मुलाकात मिताली राज से हुई और वे क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित हुईं।

अभ्यास के कारण कक्षाएं छोड़ने के बावजूद, 12वीं कक्षा में उन्होंने 91.8% (वाणिज्य) अंक प्राप्त किए। अपने स्कूल के दिनों के दौरान, उनके परिवार ने परवीन को आवश्यक अवसर प्रदान करने के लिए उन्हें एक प्रसिद्ध निजी स्कूल में दाखिला दिलाने का निर्णय लिया।

Nuzhat Parween की आजीविका

नुज़हत एक फुटबॉल खिलाड़ी हुआ करती थीं और मध्य प्रदेश की अंडर-16 फुटबॉल टीम की कप्तान थीं।

नुज़हत केवल पाँच वर्षों के भीतर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं।

क्रिकेट में उनका सफ़र 2011 में शुरू हुआ जब सिंगरौली में एक अंतर-ज़िला टूर्नामेंट के लिए महिला टीम का गठन किया गया, और प्रशासन के पास पर्याप्त खिलाड़ी नहीं थे। Nuzhat Parween जो उस समय एक जूनियर राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी थीं, को टीम का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया गया था।

उन्होंने अंतर-ज़िला क्रिकेट प्रतियोगिता में सिंगरौली टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए विकेटकीपर के रूप में शुरुआत की। उनके प्रदर्शन के आधार पर, उन्हें मध्य प्रदेश की अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम में विशेष स्थान दिया गया।

2012-13 में, उनके प्रदर्शन के आधार पर, उन्हें सेंट्रल ज़ोन अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम में उप-कप्तान के रूप में चुना गया।

उन्होंने रीवा डिवीजनल क्रिकेट एसोसिएशन के कोच एरिल एंथोनी के अधीन कोचिंग ली। वह अपने कोच के अधीन अभ्यास करने के लिए 3 महीने में 15-20 दिनों के लिए सिंगरौली से रीवा तक बस से नौ घंटे की यात्रा करती थीं।  नुज़हत के अनुसार, वह अक्सर अकेले यात्रा करती थीं और इससे उनके परिवार को उनकी सुरक्षा की चिंता होती थी, क्योंकि सिंगरौली में यात्रा के विकल्प सीमित हैं।

Nuzhat Parween को राष्ट्रीय टीम में अपने चयन के बारे में भोपाल से सिंगरौली ट्रेन से वापस आते समय पता चला। वह दीप्ति शर्मा के बाद विश्व टीम में जगह बनाने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी थीं। उनकी जर्सी का नंबर सात है।

उन्होंने 15 मई 2017 को 2017 दक्षिण अफ्रीका चतुष्कोणीय श्रृंखला में आयरलैंड के खिलाफ महिला एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट (WODI) की शुरुआत की।

परवीन 2017 महिला क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में पहुंचने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थीं, जहां टीम इंग्लैंड से नौ रन से हार गई थी।

सिंगरौली लौटने पर, रेलवे स्टेशन पर लोगों की एक बड़ी भीड़ ने उनका स्वागत किया, जिसमें बच्चों का एक समूह, डीसीए सिंगरौली के सदस्य, मीडिया और उनका परिवार शामिल था। उन्होंने 2025 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के साथ अपनी महिला प्रीमियर लीग यात्रा शुरू की।

Nuzhat Parween की व्यक्तिगत रुचियां

उनकी पसंदीदा खेल फ़िल्में प्रतिष्ठित महिला हॉकी फ़िल्म चक दे इंडिया और ‘ एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी ‘ हैं। वह मिताली राज और एमएस धोनी से बहुत प्रेरित हैं। वह इंग्लैंड की विकेटकीपर सारा टेलर को भी फॉलो करती हैं। नुज़हत क्रिकेट के सपने पूरे करने के साथ-साथ दूरस्थ शिक्षा के ज़रिए बी.कॉम कर रही हैं। वह अपनी यात्रा का श्रेय साथी क्रिकेटर हरिप्रिया दास को देती हैं, जिन्होंने उनका मार्गदर्शन किया।

Nuzhat Parween  उर्फ खुशबू भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाने वाली मध्यप्रदेश के रीवा संभाग की पहली महिला क्रिकेटर बनी हैं। वे मध्यप्रदेश के सिंगरौली से है। उन्होंने अपना स्थान बतौर विकेट कीपर व बल्लेबाज के रूप में बनाया है। नुजहत स्नातक की पढ़ाई दिल्ली से कर रही हैं तथा वेस्टर्न रेलवे में नौकरी भी करती हैं।

Nuzhat Parween का जब 2011 में सिंगरौली महिला क्रिकेट टीम के सदस्य के रूप में चयन हुआ, उसने डिविजन टीम रीवा व शहडोल में दो शतक लगाये थे। इसके बाद परवीन का हौसला बढ़ता गया। उसने 2015 के सीनियर इंटर जोनल टूर्नामेन्ट में 101 रन की नाबाद पारी खेली थी। उनका मध्यप्रदेश की अंडर -19 टीम में चयन हुआ। मध्य प्रदेश की तरफ से खेलते हुए उन्होंने भारतीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी तरफ खींचा।

उनके पिता मसीह आलम कोल माइन में मशीन ऑपरेटर हैं। मां नसीमा बेगम गृहणी हैं। उसके भाई आमिर हैं। नुजहत ने भारत की ओर से अबतक एक वनडे और तीन टी-20 मैच खेले हैं।

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Nuzhat Parween की बदली किस्मत

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य Nuzhat Parween रविवार को कानपुर स्थित आईआईटी के एक कार्यक्रम में शामिल हुई।

महिला क्रिकेट टीम में अभी तक लोग सिर्फ अंजुम चोपड़ा, मिताली राज व झूलन गोस्वामी को ही जानते थे, लेकिन सात नंबर की जर्सी पहनकर विकेट के पीछे गेंद को पकड़ने वाली नुजहत परवीन भी इन दिनों सुर्खियों में हैं। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य परवीन रविवार को कानपुर स्थित आईआईटी के एक कार्यक्रम में शामिल हुई।

जहां उन्होंने बताया कि पहले वो एथलीट में हाथ आजमाना चाहती थीं और सौ मीटर की रेस में गोल्ड मेडल भी जीता। लेकिन सिंगरौली में एक क्रिकेट प्रतियोगिता हो रही थी। टीम में एक सदस्य की जगह खाली थी। हमारे टीचर ने टीम सिलेक्टर को मेरा नाम सुझाया और उन्होंने मेरा टीम में चयन कर लिया। उस टूर्नामेंट में मैं मैन ऑफ दा सीरीज घोषित की गई और यहीं से एक रेसर हाथों मे ग्लव्स पहनकर क्रिकेटर बन बैठीं।

Nuzhat Parween लड़कों के साथ खेलती थी क्रिकेट

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेट-कीपर और युवा खिलाड़ी सिंगरौली (मध्य प्रदेश) की रहने वाली नुजहत परवीन रविवार को आईआईटी काके एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कानपुर आई। परवीन ने इस मौके पर आईआईटी स्टूडेंट्स के साथ मस्ती की और अपनी कामयाबी के किस्से शेयर किए।

Nuzhat Parween ने बताया कि पहले वो एथलीट बनना चाहती थीं और 100 मीटर रेस में जिला स्तर पर गोल्ड मेडल भी जीता। वो इसके लिए मेहनत कर रही थीं और कभी-कभी स्कूली लड़कों के साथ क्रिकेट भी खेला करती थी। हमारे यहां एक क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन होना था।

सिंगरौली की टीम में एक सदस्य की जगह खाली थी, जो काफी प्रयास के बाद भी भरी नहीं जा सकी थी। जिला एसोसिएशन के सेक्रेटरी विजयानंद जायसवाल ने मुझे कभी स्कूल में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलता देखा था तो उन्होंने टीम में शामिल कर लिया। उस टूर्नामेंट के बाद क्रिकेट ही भविष्य बन गया।

Nuzhat Parween की बड़े भाई करते हैं हौंसला अफजाई

जहां आज के दौर में मुस्लिम समाज में महिलाओं पर अनेक तरह के बंदिशे होती हैं, वहीं Nuzhat Parween इन सबकी परवाह किए बगैर आगे बढ़ रही हैं। परवीन कहती हैं कि मुस्लिम परिवार से होने के बाद भी मुझे खास बंदिशों का सामना नहीं करना पड़ा। कहा कि मुझे मिताली राज की तरह बनना है।

अभी मुझे बैटिंग में दम दिखाना है। पर्याप्त मौके नहीं मिलने के कारण अभी तक इसमें पीछे रही हूं। अब लगातार प्रैक्टिस कर रही हूं। वेस्टर्न रेलवे में कार्यरत नुजहत के पिता मसी आलम में एक कम्पनी में कार्यरत हैं तो मां नसीमा बेगम गृहणी हैं। नुजहत ने बताया कि उसके भाई आमिर ने हमेशा उसकी हौंसला अफजाई की है।Nuzhat Parween मुम्बई से अभी स्नातक की पढ़ाई कर रही है।

Nuzhat Parween ने कमला क्लब में मारे थे कई छक्के

Nuzhat Parween ने कहा कि वह कानपुर इससे पहले तीन बार आ चुकी है। पहली बार 2011 में कमला क्लब में इंटर स्टेट टूर्नामेंट खेलने आई थी। इस दौरान यूपी की टीम के साथ हमारा मैच था। परवीन कहती हैं कि उस मैच में मैने 80 रन की पारी खेली थी और पाचं छक्के जड़े थे। इसी मैच के बाद मेरे करियर में चार चांद लग गए। परवीन, ने इसके बाद अंडर-19 व अंडर-23 भी खेला है।

कहती हैं, ग्लब्स पहनना मुझे बहुत अच्छा लगता है। इसी शौक ने मुझे विकेट-कीपर बना दिया। क्योंकि इसकी टीम में विशेष जगह होती है। बल्लेबाज व गेंदबाज कई होते हैं मगर विकेट-कीपर सिर्फ एक। Nuzhat Parween ने कहा कि अभी मिस्टर परफेक्ट के बारे में कुछ नहीं सोचा है। अभी तो मुझे मिस परफेक्ट बनना है। फिलहाल पूरा ध्यान क्रिकेट पर है। अपनी विकेट-कीपिंग और बैटिंग में और सुधार लाना है। साथ ही अपनी पिछली गल्तियों को लगातार सुधारने का प्रयास कर रही हूं।

Nuzhat Parween के साथ साक्षात्कार –

महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर Nuzhat Parween से विशेष बातचीत।

1. आपने पहली बार क्रिकेट कब खेला था?

असल में, मैं बचपन से ही अपने स्कूल के दोस्तों के साथ गली क्रिकेट खेलती थी, लेकिन मैंने अपना पहला बीसीसीआई मैच 14 साल की उम्र में खेला।

2. आप मध्य प्रदेश के सिंगरौली नामक एक छोटे से कस्बे से हैं, वहाँ क्रिकेट के बारे में कैसी धारणा थी?

क्रिकेट से पहले, मैंने राष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है और राज्य एथलेटिक्स (100 मीटर) में स्वर्ण पदक जीता है। मैं लड़कों के साथ खेलने वाली एकमात्र लड़की थी। हालाँकि, मेरे परिवार ने मेरा बहुत साथ दिया, लेकिन समाज शिकायत करता था।

लेकिन 2017 के विश्व कप के बाद, लोगों का नज़रिया पूरी तरह बदल गया है। अब वे भी चाहते हैं कि उनकी बेटियाँ कुछ बड़ा करें!

3. स्कूल में एक होनहार छात्र होने के नाते, जिसने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 92% अंक प्राप्त किए, आपने पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट को कैसे मैनेज किया?

मुझे 91.8% (कॉमर्स+गणित) मिले। मैं बहुत सारी क्लासेस मिस करती थी, लेकिन मैं उन सभी संस्थानों की बहुत आभारी हूँ जहाँ मैंने पढ़ाई की, क्योंकि उन्होंने मेरा बहुत साथ दिया।

मुझे याद है कि 12वीं में, बोर्ड परीक्षा से एक महीने पहले, मैं स्कूल के तुरंत बाद अलग-अलग विषयों की 3 कोचिंग क्लासेस में जाती थी। उन दिनों मेरे सभी स्टाफ सदस्य मुझे बहुत ज़्यादा समय देते थे।

4. आपने अन्य एथलीट खेल भी खेले और शुरुआती दिनों में ही आपको फुटबॉल से प्यार हो गया। इससे आपको क्रिकेट में, खासकर विकेटकीपिंग में, कैसे मदद मिली?

मूल रूप से मैं फुटबॉल में फॉरवर्ड खेलती थी और इससे मुझे अपनी सहनशक्ति और ताकत बनाए रखने में बहुत मदद मिली, जो किसी भी खेल में बहुत महत्वपूर्ण है। विकेटकीपिंग के लिए, मुझे ग्लव्स का बहुत शौक था और यह सबसे कठिन विभाग था जो मेरी जिला टीम मुझसे करवाना चाहती थी। फुटबॉल से मेरे पैरों में ताकत आई और इसी से मुझे कीपिंग में मदद मिली।

5. आपने अपने शुरुआती क्रिकेट के दिन मध्य प्रदेश में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलते हुए बिताए। लड़कों के खेल से मुकाबला करना कितना मुश्किल था?

सिंगरौली के लड़के मुझे उनके साथ अभ्यास करने और उनसे प्रतिस्पर्धा करने का बराबर मौका देते थे। इसलिए मुझे किसी भी क्षेत्र के लड़कों से मुकाबला करने में कभी कोई दिक्कत नहीं हुई।

6.Nuzhat Parween को खेल के प्रति अपने जुनून और क्रिकेट को करियर बनाने का एहसास कब हुआ?

2011 में, मध्य प्रदेश की जूनियर टीम अयोग्य घोषित कर दी गई और इसने राष्ट्रीय स्तर पर खेलने की मेरी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसलिए, 2012 में मैं अपनी टीम को राष्ट्रीय स्तर पर खिलाना चाहती थी। उसी साल एक टूर्नामेंट में मेरी मुलाकात मिताली दीदी से हुई और वह मेरी आदर्श बन गईं। तब मुझे एहसास हुआ कि क्यों न मैं क्रिकेट को अपना करियर बनाऊँ।

7. बचपन में आपके आदर्श/प्रेरणास्रोत कौन थे?

मेरा परिवार, खासकर मेरे बड़े भाई आमिर सोहेल, जो पढ़ाई के लिए खुद अमेरिका गए और सब कुछ शांति से संभाला। उन्होंने मुझे इस क्षेत्र में करियर बनाने में सबसे ज़्यादा सहयोग दिया। साथ ही, मेरी बड़ी बहन नेमत परवीन मुझे स्कूल के दिनों में पढ़ाती थीं, जिससे मुझे पढ़ाई में कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। मेरे माता-पिता ने मुझे व्यावहारिक और खुले विचारों से सोचने के लिए प्रेरित किया।

8. आप बेहतर स्कूल और क्रिकेट के अवसरों की तलाश में मध्य प्रदेश के एक और शहर रीवा चले गए? यह फैसला कितना आसान/मुश्किल था?

मैं एरिल एंथनी सर के मार्गदर्शन में अच्छी प्रैक्टिस करने के लिए 3 महीने में 15-20 दिन रीवा (सिंगरौली से सड़क मार्ग से 9 घंटे) जाती थी। यह इतना आसान नहीं था क्योंकि उन दिनों सड़क मार्ग से यात्रा करना मेरे लिए सबसे मुश्किल होता था, और वह भी बस से, लेकिन कड़ी मेहनत और बेहतर प्रदर्शन के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार थी। 

9. अपनी यात्रा की शुरुआत में आपको और आपके परिवार को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा, बताइए?

सिंगरौली एक छोटा शहर है, इसलिए यात्रा के दौरान कई मुश्किलें आईं। ट्रेनों की कमी, वो भी समय पर नहीं, और मेरे माता-पिता मेरी सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे क्योंकि मैं हमेशा अकेले यात्रा करता था।

10. Nuzhat Parween आपका परिवार आपके हर अच्छे-बुरे समय में आपके साथ रहा है। आप उनके लिए क्या कहना चाहेंगे?

यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे एक ऐसा परिवार मिला (पिता- मसीह आलम, माता- नसीमा बेगम, बड़ा भाई- आमिर सोहेल, बड़ी बहन- नेमत परवीन, छोटी बहन- आसिया परवीन और छोटा भाई- अयान अशरफ सोहेल) जिन्होंने मुस्लिम जाति से होने के बावजूद मुझे खेलने से कभी नहीं रोका।

हमारे यहाँ पर्दा प्रथा नहीं थी। संकीर्ण सोच वाला समाज हमें रोक नहीं सका। बेशक, वे मेरी देर रात की प्रैक्टिस से चिंतित थे, लेकिन उन्होंने मेरे खेलने के लिए कभी “ना” नहीं कहा! मेरे माता-पिता और भाई-बहनों ने मुझे आज जो कुछ भी हूँ, उसमें मदद की!

11. आपके प्रियजनों में से और किसका आपकी सफलता में सबसे ज़्यादा योगदान रहा है?

मैं जहाँ भी गई, हर कोच और मेरे सभी दोस्तों ने मेरे आसपास एक सकारात्मक माहौल बनाया ताकि मैं और बेहतर प्रदर्शन कर सकूँ। मैं व्यक्तिगत रूप से अपने सभी सहपाठियों, मध्य प्रदेश के सीनियर्स और कर्मचारियों, केएनसी कॉलेज के कर्मचारियों, स्कूल के कर्मचारियों, ज़िला सदस्यों और सीनियर्स, पश्चिम रेलवे के सीनियर्स और डायना मैडम का मुझ पर विश्वास रखने के लिए धन्यवाद करना चाहती हूँ। ख़ास तौर पर उन दोस्तों का ज़िक्र करना चाहूँगा जिन्हें मैं सुबह 5 बजे भी फ़ोन कर सकती थी। मेरी सफलता में इन सभी का योगदान रहा है।

12. Nuzhat Parween क्या आपको वो पल याद है जब आपको पहली बार राष्ट्रीय टीम में अपने चयन की खबर मिली थी? क्या आप खुशी से नाच उठे थे? आपकी शुरुआती प्रतिक्रियाएँ क्या थीं?

चैलेंजर्स ट्रॉफी के तुरंत बाद, मैं सिंगरौली वापस जा रही थी (भोपाल में पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के बाद), मेरे दो क्रिकेट दोस्तों ने ग्रुप में वेस्टइंडीज दौरे और एशिया कप की सूची भेजी थी और मैं ट्रेन में थी, इसलिए उन फ़ाइलों को तुरंत डाउनलोड नहीं कर पाई। लेकिन जब मैंने वो संदेश देखे, तो मैं ऐसा बोली… वाह! एक पल के लिए तो मुझे लगा कि मैं सपना देख रही हूँ। वाकई, मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा दिन।

13. Nuzhat Parween के परिवार और दोस्तों को यह जानकर कितना गर्व हुआ होगा कि आप राष्ट्रीय टीम में शामिल हो गए हैं?

जैसे ही मुझे टीम में अपने चयन के बारे में पता चला, मैं अपने परिवार के सदस्यों को, जिन्होंने मेरी सफलता के लिए सबसे ज़्यादा प्रार्थना की है, उन्हे बताना चाहती थी। मैंने सबसे पहले उन्हें ही यह खबर बताई। और सबसे अच्छी बात यह थी कि मैं उस दिन अपनी सबसे अच्छी दोस्त के साथ यात्रा कर रही थी। वह मुझसे ज़्यादा खुश थी।

जल्द ही यह खुशखबरी आग की तरह फैल गई और मेरे परिवार के सभी सदस्य खुशी से फूले नहीं समा रहे थे। मेरे सीनियर्स, जिनकी सलाह मैंने अपने पूरे करियर में मानी थी, मेरा पहला मैच देखने के लिए बहुत उत्साहित थे। मेरे सभी दोस्त और कर्मचारी बहुत खुश थे।

14. पिछले साल भारत में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ़ खेले गए अपने टी20 डेब्यू मैच के बारे में बताइए? Nuzhat Parween क्या आप नर्वस थे या उत्साहित?

सच कहूँ तो, मैं बिल्कुल भी नर्वस नहीं थी। शायद इसलिए, क्योंकि मैं पहले ही भारतीय रेलवे टीम के ज़्यादातर भारतीय खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर कर चुकी थी। मैं सचमुच शांत थी और मैंने अपने मन पर चिंता को हावी नहीं होने दिया। नीली भारतीय जर्सी का प्रतिनिधित्व करना सबसे ख़ास एहसास है जो किसी को भी हो सकता है।

15. Nuzhat Parween ने अब तक 1 वनडे और 3 टी20 मैच खेले हैं। इतने संघर्षों के बाद हर बार भारत का प्रतिनिधित्व करना कैसा रहा?

मैं जब भी मैदान पर प्रदर्शन करने जाती हूँ, इसे एक नई चुनौती की तरह लेती हूँ। मैं गेंद-दर-गेंद खेलती हूँ, अंतिम परिणाम पर ज़्यादा ध्यान नहीं देती। भारतीय जर्सी पहनने का एहसास, राष्ट्रगान बजते ही रोंगटे खड़े हो जाना, दर्शकों का अपनी टीम के प्रति उत्साह और समर्थन, ये सब इसे और भी खास बना देते हैं।

16. विश्व कप टीम में दीप्ति शर्मा के बाद आप सबसे कम उम्र की खिलाड़ी थीं। इतनी कम उम्र में विश्व कप टूर्नामेंट खेलना कैसा लग रहा है?

मुझे लगता है कि कुछ बड़ा करने के लिए यही सही उम्र है। सभी दिग्गजों ने इसी उम्र में कमाल किया है। लेकिन सिर्फ़ एक वनडे मैच के अनुभव के साथ विश्व कप टीम में जगह बनाना मेरे लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं था। कम अनुभवी और जूनियर होने का फ़ायदा यह रहा कि भारतीय टीम के हर सदस्य और स्टाफ़ ने हमें बच्चों की तरह प्रेरित और लाड़-प्यार किया। विश्व कप सीखने का एक बेहतरीन अनुभव था।

17. दिग्गज मिताली राज, झूलन गोस्वामी और हरमनप्रीत कौर के साथ ड्रेस रूम शेयर करना कैसा रहा?

मेरे लिए यह किसी सपने से कम नहीं था। जिन दिग्गजों की तस्वीरें मैंने अपने फ़ोन में सेव की थीं, वे मेरे सामने वर्ल्ड रिकॉर्ड परफॉर्मेंस दे रही थीं। मुझे लगता है कि मैं वाकई बहुत खुशकिस्मत और सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे ऐसा मौका मिला।

18. विश्व कप के सफल दौरे के बाद जब आप घर (सिंगरौली) लौटे तो लोगों की क्या प्रतिक्रिया थी?

उन्होंने हमारे साथ पहले जैसा व्यवहार नहीं किया था। मुझे उम्मीद नहीं थी कि लोग स्टेशन पर मेरा स्वागत करने के लिए इतनी भीड़ लगा देंगे। बच्चों के एक बैंड ग्रुप और डीसीए सिंगरौली के सदस्यों, मीडिया और मेरे परिवार ने मिलकर इस दिन का जश्न मनाया। मुझे बहुत खास महसूस हुआ, मेरा आगमन सिंगरौली के लोगों के लिए किसी खास मौके से कम नहीं था। मैं हर दिन सिंगरौली में 3-4 कार्यक्रमों में शामिल होती थी। 

19. विश्व कप का सबसे खास पल कौन सा है जो आज भी आपके दिल में ताज़ा है?

हैरी डी की उस ज़बरदस्त पारी से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल जीतना और 6 बार की चैंपियन टीम को हराना, मुझे लगता है, सबसे खास था। इसने हमें एहसास दिलाया कि हम भारतीय महिला टीम कितनी मज़बूत हैं।

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Nuzhat Parween के एक शब्द में उत्तर (आपका पसंदीदा):

1. फिल्म – चक दे इंडिया

2. दोस्तों के साथ घूमने की जगह – लेह लद्दाख

3. क्रिकेट खिलाड़ी – मिताली राज

4. गाना – इकतारा

5. जंक फूड – पानीपुरी

6. हॉलिडे डेस्टिनेशन – मलेशिया

9. सबसे अच्छी दोस्त (टीम में) – दीप्ति और मानसी

Nuzhat Parween भारतीय महिला क्रिकेटर: एकमात्र मुस्लिम क्रिकेटर

Nuzhat Parween का कहना है कि उनके समुदाय की और भी लड़कियां खेलेंगी नुजहत हाल ही में इंग्लैंड में संपन्न विश्व कप में उपविजेता रही भारतीय महिला टीम में शामिल एकमात्र मुस्लिम क्रिकेटर थीं और वह मध्य प्रदेश के एक छोटे से शहर से हैं।

इंग्लैंड में हाल ही में संपन्न हुए विश्व कप में उपविजेता रही भारतीय महिला टीम में शामिल एकमात्र मुस्लिम क्रिकेटर नुज़हत परवीन हैं। वह मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे सिंगरौली की रहने वाली हैं। नुजहत को विश्व कप में एक भी मैच में हिस्सा लेने का मौका नहीं मिला क्योंकि उन्हें टीम में दूसरे विकेटकीपर के रूप में चुना गया था।

मंगलवार को सिंगरौली मे इस लड़की ने बताया, “विश्व कप से पहले मुझे एक अनमोल उपहार मिला था। दक्षिण अफ्रीका में भारत के तैयारी दौरे में आयरलैंड के खिलाफ मैच में मुझे पहली ग्यारह में चुना गया था और उस विशेष दिन हमारी कप्तान मिताली राज ने मुझे ‘कैप’ दी थी।” “यह मेरे लिए जीवन भर बहुत खास रहेगा।”

Nuzhat Parween ने कहा, “हालांकि मुझे विश्व कप में खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन मुझे मिताली राज, झूलन गोस्वामी और हरमनप्रीत कौर जैसी क्रिकेटरों के साथ अभ्यास करने का दुर्लभ अनुभव मिला। उनके साथ नेट्स और ड्रेसिंग रूम साझा करना बहुत बड़ा अनुभव था। मैंने उन्हें देखकर बहुत कुछ सीखा है।”

नुज़हत का सफ़र शुरुआत में बिल्कुल भी आसान नहीं था, उन्होंने अपने समुदाय की रूढ़िवादिता से खुद को अलग करना शुरू कर दिया था। जब नुज़हत घर से बाहर जाती थीं और लड़कों के साथ खेलती थीं, तो उनके पिता मसी अली और माँ नसीमा बेगम को कई सामाजिक बाधाओं का सामना करना पड़ता था। उस समय नुज़हत फुटबॉल खेलती थी।

उसने सब-जूनियर राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप में अंडर-15 मध्य प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व भी किया था। परवीन परिवार के रिश्तेदार और दोस्त अक्सर उनका मज़ाक उड़ाते थे। यहाँ तक कि कुछ लोगों ने कड़ा विरोध भी जताया और पूछा कि एक मुस्लिम परिवार की लड़की घर से बाहर जाकर लड़कों के साथ मैदान में क्यों खेलेगी। लेकिन नुज़हत के माता-पिता इतने प्रगतिशील थे कि उन्होंने अपनी बेटी का पूरा साथ दिया और उसे आगे खेलने के लिए प्रोत्साहित किया।

फुटबॉल खेलने के बावजूद, नुज़हत एक क्रिकेटर बन गईं, इसकी वजह उनके राज्य की एक वरिष्ठ क्रिकेटर हरिप्रिया दास थीं, जिन्होंने एक बार नुज़हत को ज़िला टीम में शामिल किया और वहीं नुज़हत ने पहली बार विकेटकीपर के तौर पर खेला।

यह सिर्फ़ पाँच साल पहले की बात है। इसके बाद उन्हें पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी और वह वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए सीनियर भारतीय महिला टीम में शामिल हो गईं।Nuzhat Parween ने कहा, “मुझे विश्वास है कि मुझे देखकर मुस्लिम समुदाय की और भी लड़कियां आगे आएंगी और क्रिकेटर बनने की कोशिश करेंगी। यह भी मेरे लिए एक बड़ा तोहफा होगा।”

Nuzhat Parween भारतीय महिला क्रिकेट टीम में शामिल

मध्यप्रदेश के सिंगरौली की Nuzhat Parween उर्फ खुशबू का सपना तब सच हो गया जब वह भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाने वाली मध्यप्रदेश के रीवा संभाग की पहली महिला क्रिकेटर बनी हैं।

नुजहत को 18 नवंबर से भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाली तीन टी-20 मैचों की सीरीज के लिए टीम में चुना गया है। इसके बाद 27 नवंबर से शुरू होने वाले एशिया कप में भी नुजहत का चयन बतौर विकेट कीपर के रूप में हुआ है।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम में सिंगरौली जिले की इस लड़की ने अपना स्थान बतौर विकेट कीपर व बल्लेबाज के रूप में बनाया है। ई-मेल माध्यम से 29 अक्टूबर को जब नुजहत को भारत की महिला क्रिकेट टीम में चयन होने की जानकारी मिली, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

नुजहत ने कहा, ‘‘पांच साल पूर्व तक मेरा क्रिकेट खेल से कोई सरोकार नहीं था, लेकिन जिला क्रिकेट संघ (डीसीए) ने मुझे उस मुकाम तक पहुंचा दिया है, जहां पहुंचना हर खिलाड़ी का सपना होता है. अधिकांश घरों के अभिभावक बेटियों को घर से बाहर भेजने से मनाही करते हैं, लेकिन मेरे माता-पिता व विदेश में रहने वाले बड़े भाई ने हमेशा सहयोग किया. जिनकी बदौलत से मैं इस मुकाम तक पहुंची हूं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘आज जिस मुकाम तक पहुंची हूं, उसका पूरा श्रेय डीसीए सचिव के साथ-साथ पूरे सदस्य व महिला क्रिकेट खिलाड़ी हरिप्रिया दास को है. जिनकी बदौलत मैं भारतीय महिला टीम का हिस्सा बन सकी.’’

नुजहत स्नातक की पढ़ाई दिल्ली से कर रही हैं तथा रेलवे में नौकरी भी कर रही हैं. डीसीए सिंगरौली के सचिव विजयानंद जायसवाल ने बताया, ‘‘नुजहत का जब 2011 में सिंगरौली महिला क्रिकेट टीम के सदस्य के रूप में चयन हुआ. उसने डिविजन टीम रीवा व शहडोल में दो शतक लगाये. इसके बाद परवीन का हौसला बढ़ता गया।  

उसने 2015 के सीनियर इंटर जोनल टूर्नामेन्ट में 101 रन की नाबाद पारी खेली थी. उनका मध्यप्रदेश की अंडर . 19 टीम में चयन हुआ। मध्य प्रदेश की तरफ से खेलते हुए उन्होंने भारतीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी तरफ खींचा।

नुजहत का भारतीय महिला क्रिकेट टीम में चयन होने पर डीसीए ने दो नंवबर को यहां सम्मान समारोह आयोजित कर उनका अभिनंदन किया था.

Nuzhat Parween उर्फ खुशबू भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाने वाली मध्यप्रदेश के रीवा संभाग की पहली महिला क्रिकेटर बनी हैं। वे मध्यप्रदेश के सिंगरौली से है। उन्होंने अपना स्थान बतौर विकेट कीपर व बल्लेबाज के रूप में बनाया है। नुजहत स्नातक की पढ़ाई दिल्ली से कर रही हैं तथा वेस्टर्न रेलवे में नौकरी भी करती हैं।

इनका पूरा नाम नुज़हत मसीह परवीन है इनका जन्म 5 सितंबर, 1996 को सिंगरौली, मध्य प्रदेश मे हुआ। अभी इनकी उम्र करीब 29 साल की है इनकी बल्लेबाजी शैली दाहिने हाथ के बल्लेबाज की है और टीम मे इनके खेलने की भूमिका विकेटकीपर के तौर पर है। 

Nuzhat Parween की टीमें

भारतीय महिला टीम

मध्य प्रदेश महिला टीम

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर महिला टीम

ट्रेलब्लेज़र्स

Nuzhat Parween के हालिया मैच

CZ महिला बनाम WZ महिला 9 और 35 0c/1s 28-मार्च-2024 एंबी अन्य

IND-A महिला बनाम भारत D 50 1c/0s 26-नवंबर-2022 रायपुर अन्य T20

IND-A महिला बनाम भारत D 24 1c/1s 24-नवंबर-2022 रायपुर अन्य T20

IND-A महिला बनाम भारत B 1 0c/0s 22-नवंबर-2022 रायपुर अन्य T20

IND-A महिला बनाम भारत C 55 0c/0s 20-नवंबर-2022 रायपुर अन्य T20

Nuzhat Parween का डेब्यू/आखिरी मैच

वनडे मैच

भारतीय महिला बनाम आयरलैंड महिला, पोटचेफस्ट्रूम में – 15 मई, 2017

विश्व टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच

पदार्पण

भारतीय महिला बनाम वेस्टइंडीज महिला, विजयवाड़ा में – 18 नवंबर, 2016

अंतिम

भारतीय महिला बनाम दक्षिण अफ्रीका महिला, लखनऊ में – 21 मार्च, 2021

Conclusion
Nuzhat Parween की जीवन यात्रा हमें यह सिखाती है कि सफलता पाने के लिए कठिन परिश्रम, लगन और आत्मविश्वास जरूरी है। छोटे शहरों से आने वाले युवाओं के लिए वह एक प्रेरणास्रोत हैं, जो यह दिखाती हैं कि संसाधनों की कमी को भी प्रतिभा और मेहनत से मात दी जा सकती है। भारतीय महिला क्रिकेट में उनके योगदान को हमेशा सराहा जाएगा, और उनका जुनून आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने की राह दिखाता रहेगा।

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